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रामसनेहीघाट तहसील मस्जिद शहीद करने में शामिल अधिकारियों पर दर्ज हो मुकदमा : फैसल मालिक

  ब्यूरो सगीर अमान उल्लाह

   बाराबंकी। तहसील रामसनेहीघाट के एसडीएम ज्यादातर विवादो में बने रहते हैं इसी कड़ी कल लाॅकडाउन अवधि में पी0ए0सी0 लगाकर अंग्रेजों के जमाने से कायम मस्जिद को मनमाने तरीके से गिरा दिया। सुमेरगंज मस्जिद को प्रशासन ने अपनी मनमानी और कोर्ट के ऑर्डर को नजरअंदाज करते हुए शहीद कर दिया गया है  जबकि कोर्ट का ये साफ कहना है कि अगर किसी भवन को गिराने का आदेश भी हो तो वह 31 मई 2021 तक न गिराया जाय, यह तो ब्रिटिश काल से कायम मस्जिद थी एसडीएम व उनके परिवार की बेनामी सम्पत्ति की जांच हो तथा दोषियों पर मुकदमा दर्ज करते हुए सी0बी0आई0 जांच की जाये। उक्त बात फैसल मालिक ने जारी प्रेस के माध्यम से दी।

तहसील प्रशासन ने दहशत कायम करने के लिए रात में दिया घटना को अंजाम 

मालूम हो कि जहाँ होती थी देश मे शांति सुकून हर बला आफत से बचने की दिन में 5 वक्त दुआ, उस बाराबंकी की रामसनेही घाट में तहसील मस्जिद को सोमवार 17 मई  को कर डाला गया मनमाने तरीके से शहीद मस्जिद की शहादत से वो माँए गयी तड़प, जिन्होंने अपने लाडलो की तबियत खराबी पर सेहत के लिये नमाजियों से फुंकवाई थी दुआ। वक्फ एक्ट के संसद और राज्य सभा मे पास नियम कानून जो राष्ट्रपति जी ने लागू किया था प्रदेश की सरकारों ने संस्तृति की थी उस एक्ट की धज्जिया उड़ाते हुए कारोना काल मे हाइकोर्ट के सभी तरह के ध्वस्तीकरण के रोक के बाद भी मस्जिद के आसपास के इलाके को सील कर चला दिया गया बुलडोजर और रातो रात सारा मलवा हटा कर कई पी0ए0सी0 बटालियन का पहरा लगा दिया गया। यहीं नहीं कई पत्रकारो के कैमरे से तस्वीरों को डिलीट करवा दिया गया और मौके पर जाने पर पूरी पाबंदी लगा दी गयी प्रशासन की इस कार्यवाही से रात भर गूंजी सिसकियां, फिजा में भी उदासी, ना कोई तमगा मिला ना वाहवाही, हा शायद इस हरकत पर खुद जमीर ने जरूर की हो ऐसी शरारत पर लानत कारोना के कहर से हो रही मौतों और तूफान की आमद से नये अजाब से सहम गये जहान में इंतेशार फैलाने की साजिश बनी चर्चा।

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