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संविदा एएनएम ने पोस्टर,तख्तियां लहराकार अपनी मांगों की आवाज को किया बुलंद

  दिलीप कुमार 

   गोरखपुर/उत्तर प्रदेश। समान काम के लिए समान वेतन, गृह जनपद स्थानान्तरण, पेट परीक्षा कराए बिना स्थायी नियुक्ति सहित कई मांगों को लेकर संविदा एएनएम ने अपने कार्यस्थल पर काली पट्टी बांध कर अपनी मांगों की तख्तियां व पोस्टर लेकर अपनी आवाज बुलंद किया। प्रदेश के हर जिलों में संविदा एएनएम के इस प्रदर्शन की खबर बनी हुई है।

एएनएम संविदा संघ की प्रदेश संयोजक प्रेमलता पांडेय ने 15 मई को प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन में उठायी गयी मांगों को संविदा एएनएम काफी पहले से उठाते रहे हैं। संविदा एएनएम ने अपने-अपने जिलों में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों को इस बारे में ज्ञापन दिए थे और मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भी लिखा था।

आज अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर पहले कोविड-19 के कारण मरे स्वास्थ्य कर्मियों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धाजंलि दी गई।

इसके बाद काली पट्टी बांधकर, अपनी मांगों का पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया गया।

संविदा एएनएम संघ की प्रदेश संयोजक प्रेमलता पांडेय ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थय मिशन के तहत लगभग 16000 एएनएम संविदा महिलाये कार्यरत है। 

हमने मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्रियों, विभाग के प्रमुख अधिकारियों को पत्र लिखकर अपनी समस्याएं बतायीं और समाधान की मांग की लेकिन हमारी आवाज नहीं सुनी जा रही है।

  हमारी मांग है कि 200 से 800 किलोमीटर दूर दूसरे जिलों में इस विकट परिस्थितियों में टीकाकरण व कोविड़ 19 के सभी कार्य सुचार रूप से कर रही सभी संविदा एएनएम को उनके गृह जिला में तैनात किया जाए, जब सभी संविदा एएनएम एक समान  कार्य कर रही हैं तो संविदा एएनएम को भी समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए, स्थायी नियुक्ति होने तक संविदा एएनएम को 25 हजार वेतन दिया जाए, पेट परीक्षा से बाहर रखकर संभी संविदा एएनएम को नियमित पदों पर नियुक्त किया जाए,क्योंकि वो पिछ्ले कई वर्षों से स्वास्थ्य विभाग से जुड़कर,कन्धे से कन्धा मिलाकर बिना अपनी जान की परवा किये बिना ही कोविड़ 19 जैसी अनेकों संक्रमण में लगातार कार्य कर रही हैं । तो हमारे ही साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है।

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