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चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्पताल के लोकार्पण का विरोध वास्तव में कोई विरोध नहीं बल्कि लोगों के जीवन से खिलवाड़ है : डिप्टी स्पीकर

राजेश सलूजा

हिसार। हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा ने कहा कि कोरोना महामारी में नागरिकों को उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए हिसार में स्थापित किए गए 500 बेड के चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्पताल के लोकार्पण का विरोध वास्तव में कोई विरोध नहीं बल्कि सीधे तौर पर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करना है। रविवार को हुई हिंसा की  भर्त्सना करते हुए उन्होंने कहा कि जब गांवों में महामारी फैल चुकी है और उपचार के लिए बेड हासिल करना चुनौती बना हुआ है, ऐसे संकटकाल में संगठित होकर हिंसा करना कोई गहरी राजनेतिक साजिश है। विपक्षी दलों की राजनीति का स्तर बेहद गिर चुका है। ऐसे में किसान संगठनों की अगुवाई कर रहे नेताओं को सुझबुझ का परिचय देते हुए राजनेतिक षड्यंत्र का हिंसा बनने से बचना होगा।

वर्चूअल माध्यम से लोकार्पण करने जैसी बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए डिप्टी स्पीकर ने कहा कि प्रजातंत्र में मुख्यमंत्री को प्रदेश का मुखिया होने के नाते अपनी जिम्मेवारियों का निर्वहन करना होता है। वे यहां 26 अप्रैल को भी स्वयं आए थे और अपनी दूरदर्शी सोच का परिचय देते हुए उन्होंने ऑक्सीजन की उपलब्धता वाली इंडस्ट्री के साथ लगते स्थान को अस्पताल के लिए चिन्हित किया था। महज 17 दिन में दिन-रात की मेहनत के बाद अस्पताल को स्थापित किया गया।  मेडिकल, पेरा मेडिकल व अधिकारियों की हौंसला अफजाई के साथ-साथ सभी प्रबंधों व उपचार व्यवस्थाओं की समीक्षा करना उनकी जिम्मेवारी बनती है ताकि कोई कमी रह जाए तो उसे दूर किया जा सके। अस्पताल में कोई राजनेतिक कार्यक्रम नहीं था और न ही कोई जनसभा की गई थी। मुख्यमंत्री का यहां आना स्वभाविक था क्योंकि आपदा प्रबंधन प्रदेश के मुखिया की जिम्मेवारी होती है। डिप्टी स्पीकर ने कहा कि गांवों में महामारी के प्रसार के बाद विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों से उनके पास रोजाना उपचार की व्यवस्था के आग्रह आते हैं। हिसार एक मेडिकल हब होने के नाते यहां न केवल हरियाणा बल्कि राजस्थान, पंजाब और दिल्ली के मरीज भी उपचार के लिए आते हैं। इस कारण से सरकारी व निजी अस्पतालों में बेड बढाने के बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं पर काफी दबाव था। ऐसे में चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्पताल की स्थापना से काफी राहत मिलने वाली है, फिर भी कुछ लोग और तथाकथित नेता अस्पताल का विरोध करके यह बता रहे हैं कि उनका आम लोगों के जीवन से कोई सरोकार नहीं है। इस पर पुलिस पर हमला करके उपद्रवियों ने अपनी मंशा को जाहिर कर दिया है, जिसके पीछे बड़ा राजनेतिक षड्यंत्र है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में राजनेतिक रोटियां सेकने वाले लोगों से सावधान रहना होगा। ये वही लोग हैं जिन्होंने देश में तैयार की गई कोरोना की वैक्सीन को भाजपा की वैक्सीन बताया था और यहां तक कहा था कि कोरोना कोई बीमारी नहीं है। इसी कारण से तो वैक्सीन के प्रति लोगों का भ्रम बना रहा। डिप्टी स्पीकर ने कहा कि रविवार को पुलिस ने कानून एवं व्यवस्था को स्थापित रखने का भरसक प्रयास किया क्योंकि हिंसा करने वालों को खुली छुट नहीं दी जा सकती। इसी के चलते रविवार को एक बड़ा नुकसान होने से बच गया। उन्होंने किसान संगठनों के नेताओं से भी अपील करते हुए कहा कि वे ऐसे समय में जब कृषि कानून पर उच्चतम न्यायालय में स्टे है, अपने आंदोलन को चलाने पर विचार करें। किसी भी समस्या का हल बातचीत है, जिसके लिए सरकार पहले भी तैयार थी और आगे भी तैयार रहेगी।

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