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बेश कीमती जमीन के चक्कर में शहीद की गई ब्रिटिशकाल की सुमेर गंज मस्जिद

  बाराबंकी आवाम ने की सी0 बी0 आई0 जांच की मांग

ब्यूरो सगीर अमान उल्लाह

बाराबंकी। तहसील राम सनेही घाट इस दी एम द्वारा की गई कार्यवाही से जहां जनता में काफी रोष है तो वही कई जिम्मेदारों ने बताया कि इस तरह की कार्यवाही से माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा दिये गये आदेश की घोर अवमानना प्रशासन द्वारा की गई है। लाॅकडाउन के दौरान जहां ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पूर्णपाबंदी है वहाँ पर हजारों की संख्या में पुलिस बल तैनात कोविड-19 का खुलेआम उल्लंघन करके मस्जिद को गलत तरीके से गिराया जाना बहुत ही निन्दनीय है। लोगों का कहना है कि सम्बंधित दोषियों पर मुकदमा दर्ज किया जाये और पूरे मामले की सी0बी0आई0 जांच की जाये।

जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नरेन्द्र वर्मा ने बताया कि रामसनेहीघाट बाराबंकी में स्थित गरीब नाबाज मस्जिद को जंहा तक सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा पुलिस बल के साथ 17 मई 21 को विधि विरुद्ध तरीके से ध्वस्तीकरण कराया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी कार्यवाही तो अंग्रजों के जमाने मे किये जाने को हमने किताबों में पढ़ा था लेकिन यह जो कार्यवाही हुई है उससे कहीं कम नही है यह सरासर तानाशाही है। मेरा मानना है इस समय देश प्रदेश में नियम कानून नही रह गया है बल्कि अंग्रेजों के शासन से ज्यादा क्रूरता की जा रही है। जनता कोविड-19 की महामारी से पीड़ित है सरकार के प्रतिनिधि अपने निजी उद्देश्यों की पूर्ति में लगी है, जो अति निंदनीय है अधिवक्ता मोहम्मद आसिफ ने कहा कि लाॅकडाउन अवधि में पी0ए0सी0 लगाकर अंग्रेजों के जमाने से कायम मस्जिद को मनमाने तरीके से गिरा दिया। सुमेरगंज मस्जिद को प्रशासन ने अपनी मनमानी और कोर्ट के ऑर्डर को नजरअंदाज करते हुए शहीद कर दिया गया है जबकि कोर्ट का ये साफ कहना है कि अगर किसी भवन को गिराने का आदेश भी हो तो वह 31 मई 2021 तक न गिराया जाय, यह तो ब्रिटिश काल से कायम मस्जिद थी। कारोना काल मे हाइकोर्ट के सभी तरह के ध्वस्तीकरण के रोक के बाद भी मस्जिद के आसपास के इलाके को सील कर चला दिया गया बुलडोजर और रातो रात सारा मलवा हटा कर कई पी0ए0सी0 बटालियन का पहरा लगा दिया गया। तस्वीरों को डिलीट करवा दिया गया और मौके पर जाने पर पूरी पाबंदी लगा दी गयी। प्रशासन की इस कार्यवाही से आवाम में काफी गुस्सा व नाराजगी देखने को मिल रही हैं ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन के जिला महासचिव फैसल मलिक ने बताया कि कोविड अस्पतालों की जांच को दबाने के लिए गिराई गई मस्जिद ताकि जनता का ध्यान हटाया जा सके और दोषियों को क्लीन चिट दी जा सके। इस पूरे मामले को जनपद के साथ पूरे प्रदेश में रोष व्याप्त है। इस सम्बंध में राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी अवगत कराया दिया गया है जल्द प्रशासन के विरूद्ध कार्यवाही करवाई जाये, इस तरह के जुल्म के खिलाफ हम लोग खामोश बैठने वाले नहीं है। दोषियों को जब तक सजा नहीं मिलेगी तब तक लड़ाई रखी जायेगी। 

   सभासद ताज बाबा राईन ने कहा कि एसडीएम व उनके परिवार की बेनामी सम्पत्ति की जांच हो जब माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने 31 मई तक सभी तरह की ध्वस्तीकरण पर रोक लगाई थी किन्तु तहसील प्रशासन ने चोरी-चोरी सुनियोजित तरीके से जनपद की गंगा जमुनी तहजीब को तार-तार करते हुए इस तरह की कार्यवाही की है। वहीं उन्होने कहा कि एस0डी0एम0 व उनके परिवार की अकूत सम्पत्ति की जांच हो तथा दोषियों पर मुकदमा दर्ज करते हुए सी0बी0आई0 जांच की जाये सपा नेता हशमत अली गुड्डू ने कहा कि प्रशासन की इस कार्यवाही से जहंा जनता में काफी रोष है वहीं इस घटना के बाद से पुलिस व प्रशासन के खिलाफ तरह-तरह की चर्चा हो रही है, पूरा प्रशासन कोरोना महामारी में ग्रामीण इलाके में तेजी से हो रही मौतों व स्वास्थ्य व्यवस्था पर ध्यान नहीं दे रहा है किन्तु बाराबंकी की कौमी एकता की सरजमी पर कोई बड़ा विवाद खड़ा करना चाहता है। प्रशासन के इस कृत्य से जहां समाज के हर वर्ग में खाली नाराजगी देखने को मिल रही है

पीस पार्टी जिला प्रभारी बाराबंकी जफर अंसारी ने बताया कि इस आपदा की घड़ी में न जाने प्रशासन को क्या सनक सवार है न तो वह वक्फ बोर्ड की मान रहा हैं न ही कोर्ट की बात को, कोर्ट ने 31 मई तक इस महामारी को देखते हुए कोई भी कार्यवाही करने से मना किया था लेकिन उसके बावजूद भी डीएम एसडीएम व पूरा पुलिस प्रशासन एक मस्जिद को शहीद करने के लिए 1 किलोमीटर का घेरा बनाकर रातो रात 100 साल से भी पुरानी मस्जिद को चंद घंटों में शहीद करके उसका मलबा भी गायब करा दिया आखिर प्रशासन को इतनी जल्दी क्यों थी जबकि पूरा प्रदेश और पूरा देश करोना फेस टू की जबरदस्त चपेट में है। यहां तक के अस्पताल में बेड नहीं है वेंटिलेटर नहीं है ऑक्सीजन नहीं है दवाई नहीं है और यहां तक के गंगा नदी में लाशें बह रही हैं न ही कोई शासन प्रशासन के लोग सुनने वाले हैं बजाएं प्रशासन को इस वक्त करोना से लोगों की जान बचाने के पूरा शासन प्रशासन एक मस्जिद को शहीद करने में लगा हुआ है जबकि ऐसी आपदा की घड़ी में जेलों में बंद लोगों को भी छोड़ दिया जाता है लेकिन अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि इस आपदा की घड़ी में प्रशासन तानाशाही रुख अख्तियार किए हुए।

सभासद मो0 नईम ने बताया कि मस्जिद के सभी कागजात हैं किन्तु प्रशासन सभी कागजातों को नजर अंदाज करके अपनी मनमानी करके जनता में भय कायम करना चाहता है। माहौल को खराब करने के लिए प्रशासन ने इस तरह की निन्दनीय कार्यवाही की है, जिससे हम लोग डरने वाले नहीं है, माकूल जवाब दिया जायेगा शहर के निवासी इमरान अशफाक ने बताया कि करोड़ों की जमीन के लालच में भूमाफियाओं के इशारे पर जल्दबाजी में रातोंरात घटना को अंजाम दिया गया, जहां जिले की स्वास्थ्य व्यस्था चैपट वहीं मंदिर मस्जिद का विवाद खड़ा करके लोगों को गुमराह किया जा रहा है

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