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कोरोना ने ईद की खुशियों पर लगाया ब्रेक, पिछले साल की तरह इस बार भी छाई मायूसी

  अंकुल गिरी विरेन्द्र

पलिया कलां खीरी।  ईद करीब है, मगर कोरोना के कारण बाजार बंद हैं। हमेशा की तरह ही इस बार भी बच्चों से लेकर युवा और महिलाओं की ख्वाहिश थी कि ईद पर नए कपड़े पहनेंगे और घर में पकवान बनेंगे। घर-घर जाकर ईद की शुभकामनाएं देंगे और सिवइयां खाकर रिश्तों में मिठास घोलेंगे, लेकिन कोरोना संक्रमण ने बाजार लॉक कर सब की खुशियां फीकी कर दी हैं। बाजार बंद होने से न तो लोग कपड़े खरीद पा रहे हैं और न ही व्यंजन बनाने के लिए सामग्री।

ईद का सभी को, खासकर बच्चों और युवाओं, में बेसब्री से इंतजार रहता है। रमजान में अल्लाह की इबादत कर अलविदा की नमाज अदा की जाती है। फिर घर परिवार और मित्रों के साथ ईद मनाई जाती है, लेकिन पिछले साल की तरह इस बार भी कोरोना ने लोगों की खुशियां को बेरूखी में बदल कर रख दिया। इस बार भी कोरोना संक्रमण के कारण न तो लोग मस्जिद में नमाज पढ़ सकते और न ही अब खुले मन से ईद ही मना सकेंगे। कर्फ्यू के चलते बाजार बंद है, जिससे बच्चों, युवाओं और बुजुुर्गों में मायूसी है। बुजुर्गों का कहना है कि त्योहार को लेकर बच्चे ज्यादा उत्साहित रहते हैं कि नए कपड़े मिलेंगे और खाने को पकवान।

गत वर्ष भी ईद का त्योहार लॉकडाउन की भेंट चढ़ गया था। सोचा था कि इस बार अच्छे तरीके से त्योहार मनेगा, लेकिन इस बार भी बाजार बंद हैं। ऐसे में न तो त्योहार को लेकर खरीदारी हो पा रही है और न ही छोटे भाई-बहनों के लिए कपड़े ही ले सके, जबकि भाई-बहन ईद पर मनपसंद कपड़े लेने के लिए पिछले साल से रट लगाए थे।

ईद के समय पिछले साल भी लॉकडाउन था और इस बार भी है। खासकर ईद पर कपड़े खरीदे जाते हैं, लेकिन बाजार बंद है। हम लोग तो हालात समझा रहे हैं, लेकिन छोटे बच्चों को समझाना मुश्किल है। हालांकि जिले व प्रदेश के जो हालात बने हुए हैं, उसे देखकर कोई कैसे खुशी मनाएंगा।

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