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सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी की कमियों को सुधारने में जुटे कार्यवाहक कुलपति रमाकान्त यादव

  सुघर सिंह

सैफई (इटावा)। सैफई मेडीकल यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति डॉ रमाकांत यादव अव्यवस्थाओं को सुधारने में जुटे है और रोज चार घंटे निरीक्षण कर रहे है। 

नए कार्यवाहक कुलपति डॉ रमाकांत यादव अपनी टीम को लेकर जी जान से व्यवस्थाएं सुधारने में जुटे हैं कल इसका असर साफ दिखाई दिया सैफई से कोई भी मरीज बिना भर्ती हुए नहीं लौटा। कल के निरीक्षण में  नए कार्यवाहक प्रति कुलपति डॉ रमाकान्त यादव के साथ  चिकित्सा अधीक्षक डॉ आदेश कुमार, सर्जरी बिभागाध्यक्ष डॉक्टर एस पी सिंह,  व मुख्य नर्सिंग अधीक्षिका लवली जेम्स मरीजों के हालात देखने उनके बेड पर जा रहे हैं और प्रत्येक मरीज से उनकी समस्याएं पूछ कर उनका हल निकाल रहे हैं डॉक्टर रमाकांत यादव पूर्व में मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधीक्षक रह चुके हैं और उन्हें इस संस्थान का लंबा अनुभव है उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें जो जिम्मेदारी मुझे दी है उसे पूरी ईमानदारी से निभाउंगा और मरीजों के इलाज में कोई कोर कसर बाकी नहीं रहेगी संस्थान में दवाइयों की कमी को पूरा करने का प्रयास जारी है और मरीजों के तीमारदारों से भी प्रति कुलपति ने बात करके उनके हालचाल लिए और उनकी समस्या पूछी कोविड-19 में आ रहे मरीजों को भी भर्ती किया जा रहा है किसी मरीज को अब दो-दो घंटे एंबुलेंस में भर्ती के लिए इंतजार नहीं करना पड़ रहा डॉ रमाकांत यादव ने कहा है कि अगले 1 सप्ताह में मेडिकल यूनिवर्सिटी में भारी बदलाव दिखेगा उन्होंने जन सहयोग से अपील करते हुए कहा चिकित्सकों पर मरीजों का बहुत भारी लोड है हमारा चिकित्सक दिन-रात मरीजों के इलाज में जी-जान से जुटा हुआ है अब तक 1 सैकड़ा से अधिक स्टाफ कोरोना संक्रमित हो चुका है उसके बाद भी मरीजों के इलाज में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है जहां कमियां हैं उन्हें सुधारा जा रहा है और आगामी 1 सप्ताह में बदलाव आम जनमानस को दिखाई देगा उनका प्रयास है कि शासन की मंशा अनुरूप कार्य किया जाए और सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में आने वाला हर मरीज भर्ती हो और यहां से ठीक होकर जाए।

कल  एक दर्जन मरीजो को किया गया एडमिट

कल शुक्रवार को सैफई में आये मरीजो राम दत्त सिंह, सुमन देवी, प्रदीप कुमार, डोली, प्रदीप सक्सेना, राजेन्द्र सिंह, राम श्री देवी, ज्ञान सिंह समेत एक दर्जन मरीजो को भर्ती किया गया। जब कि पहले मरीज बिना भर्ती या तो लौट जाते थे या फिर 2 -3  घण्टे एम्बुलेस में तड़पते रहते थे।

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