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कोरोना : सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती होने के लिए घंटों तड़प रहे मरीज

मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना कर रहे है सैफई मेडीकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ राजकुमार 

न मरीजो को भर्ती किया जा रहा है न किसी अन्य अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है 

सुघर सिंह 

इटावा। सैफई मेडीकल यूनिवर्सिटी में इलाज कराने आए मरीज़ों को तीन - चार घंटे बाहर तड़पना पड़ रहा है। उसके बाद भी बिना भर्ती किए मरीज़ों को लौटाया जा रहा है। आक्सीजन फ्लो मीटर उपलब्ध न होने पर तीमारदारो से बाहर मेडीकल स्टोर से बाहर से मंगाए जा रहे हैं इसमें भारी कमीशनखोरी का अंदेशा है। 

ऑक्सीजन फ्लो मीटर (ओटू चेम्बर ) को बाहर से खरीद कर ला रहे तीमारदार की फ़ोटो हमारे संवाददाता के कैमरे में कैद हो गयी जब रिपोर्टर ने मरीज के तीमारदार को पूछा कि यह मशीन कहाँ से ला रही हो तो महिला तीमारदार दौड़ते हुए कदमो से बिना कुछ बोले अंदर वार्ड में चली गयी। 

सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी की व्यवस्थाओं को कुलपति भले ही चाक चौबंद बताते हों लेकिन हमारे संवाददाता द्वारा मौके पर जाकर की गई पड़ताल में कई लापरवाही  सामने आई है मेडीकल यूनिवर्सिटी मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना कर रही है यहां इलाज व भर्ती को आए मरीजों को घंटों बाहर तड़पना पड़ता है ना कोई उन्हें देखता है और ना ही किसी प्राइवेट अस्पताल में उनके भर्ती कराने की कोई व्यवस्था की जाती है बल्कि मरीज उल्टे पैर बिना इलाज व भर्ती के लौट जाता है आज हमारे संवाददाता ने सैफई मेडीकल यूनिवर्सिटी के ट्रामा सेंटर पहुंचकर भर्ती के लिए आ रहे मरीजों की हालत जानी हुआ उनके तीमारदारों से भी बात की मैनपुरी से आया हुआ मरीज मंशाराम लगभग दो घंटे ट्रामा सेंटर के बाहर स्ट्रेचर पर बिना ऑक्सीजन के तड़पता रहा लेकिन मरीज को ऑक्सीजन न होने की बात कहकर भर्ती नही किया और परिजन प्राइवेट एम्बुलेंस में लेकर चले गए।  तीमारदारों ने बताया कि मरीज को कोई भी डॉक्टर देखने नहीं आया ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है कह कर के मरीज से किनारा कर लिया मुख्यमंत्री के दावे और आदेश की पोल सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी खोल रही है मुख्यमंत्री ने आदेश दिए थे कि कोई मरीज अस्पताल से लौटाया  नहीं जाएगा अगर अस्पताल में जगह नहीं है तो अन्य प्राइवेट अस्पतालों में बात करके मरीज को भर्ती कराया जाएगा लेकिन सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी अपनी ज़िम्मेदारी से किनारा कर रही है और मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना कर रही है।  यहां के हालात बहुत ही चिंताजनक है कोविड वार्ड परिसर में जब हमारे संवाददाता द्वारा मौके पर जाकर पड़ताल की गई तो देखा कि कोविड वार्ड में जाने बाले मुख्य गेट पर गेट पर कूड़े का ढेर लगा हुआ है जिसमें कोविड वार्ड की  गंदगी दस्ताने और मास्क बिखरे पड़े हुए हैं उसी के पास में एंबुलेंस खड़ी हुई है जिसमें बसरेहर सुभाष चंद्र  मरीज लेटा हुआ है उनके मुंह पर ऑक्सीजन लगी हुई थी जब जानकारी की गई तो बताया कि 3 घंटे से मरीज एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे जिंदा है और अस्पताल में ऑक्सीजन फ्लो मीटर उपलब्ध होने के कारण बाहर से मरीज के तीमारदार को भेजकर  मेडिकल स्टोर से ऑक्सीजन फ्लो मीटर मंगाए जा रहे हैं प्रश्न यह है के कोरोना मरीजों की लगातार बढ़ रही संख्या के बावजूद भी सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रशासन मरीजों के लिए प्रयोग होने वाली सामग्री पर आखिर क्यों ध्यान नहीं दे रहे है।

गोपनीय सूत्र बताते है कि कोविड वार्ड के कुछ कर्मचारी मेडिकल स्टोरों  पर अपनी सेटिंग बनाए हुए हैं और कमीशन खोरी करके ऑक्सीजन फ्लो मीटर तीमारदारों से मनमाफिक दामो में अपने मनचाहे मेडिकल स्टोरों पर तीमारदारों को भेजकर मंगवा रहे हैं और बहाना कर रहे हैं कि अस्पताल में ऑक्सीजन फ्लो मीटर नहीं है सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में कुलपति की लापरवाही व तानाशाही से दिनों दिन मेडिकल यूनिवर्सिटी की साख को बट्टा लग रहा है और कुलपति रिमोट वाले दरवाजे से बाहर नहीं निकलते हैं और अब संस्थान में दवाइयों की भी भारी कमी बताई जा रही है मरीज अपने परिजन को बचाने के लिए जूझ रहा है। इस पूरे मामले के बारे में कुलपति का पक्ष जानने के लिये उनके नंबर पर फोन किया लेकिन कुलपति द्वारा फोन नही उठाया गया। फोटो विवरण: ट्रॉमा सेंटर के बाहर भर्ती न किया जाने पर मरीज को अन्यत्र के जाते हुए परिजन। आक्सीजन फ्लोमीटर न होने की वजह से कोविड वार्ड के बाहर तीन घंटे से भर्ती होंने के इन्तज़ार में एम्बुलेंस में बैठा मरीज़। ट्रामा सेंटर के बाहर स्ट्रेचर पर दो घंटे से भर्ती होने के लिए लेटा मैनपुरी से आया मरीज।

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