Subscribe Us

घर पर रहकर बच्चे बड़े सब इबादत में मशगूल, रमजान का अंतिम असरा आखरी दौर में

ब्यूरो सगीर अमान उल्लाह

बाराबंकी। पवित्र रमजान तीसरा असरा जहन्नुम से आजादी का शुरू है। रमजान माह को तीन हिस्सों में बांटा गया है। एक असरा 10 दिन का होता है। इस दौरान बच्चे बड़े सभी इबादत में पूरी तरह मशगूल है रमजान माह का पहला असरा रहमत का, दूसरा हिस्सा मगफिरत का एवं तीसरा हिस्सा जहन्नुम से आजादी का है। इन 10 दिनों में लोग बारगाहे इलाही में खूब इबादत करके जहन्नुम से आजादी की फरियाद कर रहे। मो. फुरकान ने बताया कि अल्लाह के प्यारे रसूल सल्लाहो अलेहिवस्लम का इरशाद मुबारक है कि रमजान के आखिरी असरे की ताक रातों रमजान की 21, 23, 25, 27 29 वीं रात में शबे कद्र तलाश करो रमजान उल मुबारक के आखिरी असरे में बेशुमार बरकतों एवं नेअमतों को लूटने के लिए लोग मस्जिदों में एहतेकाफ में बैठेंते है ईद का चांद दिखाई देने तक दिन-रात इबादत करेंगे बताया जाता है कि इससे प्रतिदिन एक हज का सवाब मिलेगा जिन मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की गई वहाँ कुरान हाफिजों का सम्मान किया जाएगा साथ ही सभी मस्जिदों में नमाज अदा कराने वाले इमाम साहेबान का भी मस्जिद कमेटियों की तरफ से इनाम-इकराम देकर इस्तकबाल किया जाएगा शबे कद्र को रात भर इबादत मगफिरत मोक्ष के लिए दुआएँ भी माँगेंगे इस रात में अल्लाह की इबादत करने वाले मोमिन के दर्जे बुलंद होते हैं। गुनाह बक्श दिए जाते हैं। दोजख की आग से निजात मिलती है वैसे तो पूरे माहे रमजान में बरकतों और रहमतों की बारिश होती है ये अल्लाह की रहमत का ही सिला है कि रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियाँ नामे-आमाल में जुड़ जाती हैं, लेकिन शब-ए-कद्र की विशेष रात में इबादत, तिलावत और दुआएँ कुबूल व मकबूल होती हैं।

अल्लाह ताअला की बारगाह में रो-रोकर अपने गुनाहों की माफी तलब करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं। इस रात खुदा ताअला नेक व जायज तमन्नाओं को पूरी फरमाता है। रमजान की विशेष नमाज तरावीह पढ़ाने वाले हाफिज साहबान इसी शब में कुरआन मुकम्मल करते हैं, जो तरावीह की नमाज अदा करने वालों को मुखाग्र सुनाया जाता है। इसके साथ घरों में कुरआन की तिलावत करने वाली मुस्लिम महिलाएँ भी कुरआन मुकम्मल करती हैं रमजान का पवित्र महीना अपने आखिरी दौर में पहुँच चुका है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ