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दुकान के पैतीस सौ रूपये जमा पूँजी से करा दिया सैनीटाईजेशन

पैसे खत्म हुए तो मुख्यमंत्री कार्यालय और स्थानीय पार्षद, विधायक ने की मदद

सचिन कुमार श्रीवास्तव

   लखनऊ। आज हम आपको मिलाने जा रहे है उत्तर प्रदेश राजधानी लखनऊ के पच्चीस साल के एक नवयुवक समाज सेवक जेपी द्विवेदी से जो की मूल रूप से जिला बस्ती के निवासी है। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े जेपी ने बी.ए. तक शिक्षा शिया पीजी कालेज से प्राप्त की है। जे.पी द्विवेदी बताते है,”मेरे पास न तो निश्चित आय का कोई जरिया है, और न ही गाड़ी,घोडा और वाहन है , पिताजी की छत्रछाया में रहते है, और जीविका के लिए जो बन पड़ता है वो करते रहते है और बाकी समय में कोशिश करता हूँ की लोगों की मदद कर पाऊं, भले ही में लोगों की पैसे और अन्य साधनों से मदद करने में सक्षम नहीं हूँ। लेकिन फिर भी मुझे लगता है की और भी बहुत से माध्यम है जिनसे लोगों की मदद की जा सकती है।पिछले कई वर्षो से समाज सेवा के कार्य में लगे जे.पी बताते है की कोरोना की इस त्रासदी में मेरे खुद के मोहल्ले में कई लोगों की मौत कोरोना के चलते हो गयी, ये त्रासदी कुछ इस तरह की थी कि मै चाह कर भी किसी की मदद नहीं कर पाया क्योकि न तो मेरा इतना नाम और प्रभाव है कि मेरे कहने से कोई अस्पताल किसी मरीज को भर्ती कर ले, और न ही मेरे पास कोई ऐसा साधन था जिससे मैं नि:शुल्क चिकित्सा सेवा के लिए उपलब्ध करा पाऊं , न ही मेरी इतनी जान पहचान है कि मेरे कहने से कोई आक्सीजन प्लांट वाला किसी को सिलेंडर उपलब्ध करा दें। ऐसे में मैंने ये निर्णय लिया और प्रयास किया कि अगर किसी मेरे आस-पास अगर किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाना है। और उसके साथ जाने वाला कोई नहीं है, तो मै जाऊंगा , किसी को सिलेंडर मिल गया, और लाने का जुगाड़ नहीं है तो ठेलिया, रिक्शा, साइकिल, जैसे भी बन पड़ा मदद की जा सकती है और जितना संभव हो सका अपने स्तर से उसका प्रयास किया गया।

   सिर पर गमछा बांधे और काँधे पर सैनीटाइजर मशीन टांगे या टैंकर के पीछे पाइप लेकर चलते हुए लोगों को आग्रह और हल्के फुल्के हंसी मजाक के लखनऊ के उत्तर विधानसभा के फैजुल्लागंज वार्ड के अंतर्गत आने वाले प्रीती नगर, गायत्री नगर, प्रभात पुरम में कोई लड़का दिखे तो आप जान लीजिये कि शख्श समाजसेवक जे.पी द्विवेदी है।देश के यूथ मीडिया प्लेटफार्म “इंडिया मित्र डाट कॉम” द्वारा चलाई जा रही सीरीज “आपदा के असली नायक” के अंतर्गत हम आपको देश दुनिया के उन लोगों से रूबरू कराने का प्रयास कर रहे है, जो हर विपदा में अपने कॉलोनी , समाज के काम आ रहे है। और इन जैसे लोगों के जिनके पास पावर , पैसा न होने के बावजूद ये जहाँ है, जिस स्थिति में है, लोगों की मदद कर रहे है, इनमे ग्लैमर भले ही न हो जिसके कारण मुख्यधारा मीडिया संस्थान इनके बारें में लिखते नहीं या लिखना नहीं चाहते लेकिन इनके कार्यों की सराहना होनी चाहिए।

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