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पहचान पत्र और मोबाइल न होने पर भी लगेगा टीका, कोरोना से बचाव को स्वास्थ्य मंत्रालय के नए दिशा-निर्देश


साधु-संत, जेल के बंदी व कैदी, वृद्धाश्रम के लोग, भिखारी, पुनर्वास केंद्रों के लोगों को मिलेगा लाभ

रिपोर्ट राकेश पाण्डेय

   सीतापुर। कोरोना से बचाव का टीका लगवाने के लिए फोटो युक्त पहचान पत्र का होना जरूरी है। लेकिन यदि आपके पास ऐसा कोई पहचान पत्र नहीं है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि किसी के पास कोई पहचान पत्र अथवा मोबाइल फोन नहीं है तो उसे टीकाकरण से वंचित नहीं किया जाएगा। 

     मंत्रालय द्वारा पहचान पत्र न रखने वाले लोगों के टीकाकरण के लिए जो दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, उसके अनुसार ऐसे लोगों का कोविन ऐप पर पंजीकरण किया जाएगा और उनके टीकाकरण के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन लोगों की पहचान करने की जिम्मेदारी जिला शासन की होगी। इस श्रेणी में बुजुर्ग, साधु-संत, जेल में बंद बंदी और कैदी, मानसिक अस्पतालों में भर्ती मरीज, वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग, भिखारी, पुनर्वास केन्द्रों में रहने वाले लोग विशेष रूप से शामिल होंगे। 

   मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि ऐसे लोगों को ढूंढने का काम जिले की टास्क फोर्स करेगी। वह, अल्पसंख्यक विभाग, सामाजिक न्याय विभाग व समाज कल्याण विभाग के सहयोग से ऐसे लोगों की पहचान कर सकती है। इन लोगों का कोविन ऐप पर पंजीकरण कराया जाएगा जिसमें लाभार्थी का नाम, जन्म का साल और लिंग दर्ज कराया जाएगा। मोबाइल नंबर और पहचान पत्र की अनिवार्यता नहीं होगी। इसका सत्यापन फैसिलिटेटर करेंगे जिसके  बाद इन लोगों का वैक्सीनेशन किया जाएगा। गाइडलाइन के मुताबिक जिले की टास्क फोर्स जिलास्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगी जो अलग-अलग समूह के लोगों की पहचान के लिए फैसीलिटेटर नियुक्त करेगा। यह फैसीलिटेटर लाभार्थियों की पहचान करेगा। 

     नोडल अधिकारी उपलब्ध डेटा के मुताबिक इन लोगों के लिए विशेष वैक्सीनेशन सत्र का आयोजन कराएंगे।

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