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महंगाई चरम सीमा के पार, परन्तु जान है तो जहान है

महंगाई चरम सीमा के पार, परन्तु जान है तो जहान है

 मो शाहिद

बाराबंकी। कोरोना काल में जहां लोगो को अपने इलाज के लिए ऑक्सीजन और रेमडेसिविर जैसी दवाइयों को ब्लैक में खरीद कर भारी रकम चुकानी पड़ रही है वहीं मंडी में घरेलू उत्पाद जैसे कड़वा तेल( मस्टर्ड ऑयल) का रेट 140 से पहुंच कर 180 हो गया है, फॉर्च्यून तेल का रेट भी चरम पर। दालों का रेट भी लगातार बढ़ता जा रहा है  चीनी 38 रुपए किग्रा से 40 रुपए प्रति किग्रा हो गया है, घरेलू एलपीजी गैस भी निरंतर बढ़ती जा रही है 846.50 रुपए हो गई है इसमें सरकार की तरफ से 35 रुपए की सब्सिडी मिलती है वो भी हर किसी के खाते में नहीं जाती है ऐसे में सवाल ये उठता है कि इस महामारी में आम नागरिक कैसे अपना जीवन यापन करेगा। क्योंकि अगले साल में भी कोरोना महामारी के चलते कई महीनों धंधा ठप रहा जिससे लोगों के पास जो भी बचा कुचा पैसा था वो भी ख़तम हो गया, क्योंकि जान है तो जहान है। अब इस साल भी कोरोना पहले से ज्यादा भयावह स्तिथि में नजर आ रहा है देश में चारों ओर लाशों के ढेर नज़र आ रहे हैं लोगो को चिता जलाने के लिए भी घंटो लाइन लगना पड़ रहा है। इस स्थिति में जब मध्यम वर्ग के लोग जो छोटा मोटा धंधा करके अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं उनको घरेलू सामान खरीदने में छींके आ रही है तो जो लोग मजदूरी और दिहाड़ी पे काम करते हैं वो कैसे अपना जीवन यापन करेंगे।  ऐसे में सरकार को चाहिए कि खाने पीने की वस्तुओं का मूल्य घटा कर लोगो को राहत की सांस देने का काम करे।

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