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स्वास्थ्य कर्मियों की कमी हो सकती है अगली बड़ी समस्या

डॉ. अजय कुमार मिश्रा 

    कोरोना वायरस ने देश मे तबाही मचा रखी है। एक तरफ जहाँ जनता अव्यवस्था का शिकार है, वही ऑक्सिजन की कमी, अस्पतालों मे बेड्स की कमी, दवाओं की कालाबाजारी, आईसीयू, वेंटीलेटर्स की कमी, घूसखोरी और संवेदनहीन समाज के कई चेहरों के साथ-साथ सरकार की लापरवाहियाँ भी जग जाहिर है। कोरोना के सरकारी आकड़े भी संदेह के घेरे मे है। जमीनी सच्चाई यही है की देश मे इस वायरस ने कोहराम मचा रखा है। अभी भी अगर सरकारें नहीं जागी तो तबाही का यह मंजर आने वाले दिनों मे इतना भयावह हो सकता है जो हम सब की कल्पना से भी परे होगा। दुनियाँ भर मे कोरोना संक्रमण की संख्या 14 करोड़ 93 लाख से अधिक हो गयी है। इस वायरस से मरने वालों की संख्या 31.48 लाख से अधिक हो गयी है। भारत मे इस वायरस की दूसरी वेब ने तबाही मचाना शुरू कर दिया है। लापरवाही चाहें जिसकी रही हो खामियाजा आम जनता भुगत रही है। विश्व मे संक्रमण की संख्या मे हम दूसरे नंबर पर पहुँच चुके है। 1 करोड़ 79 लाख से अधिक लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके है जबकि सरकारी अकड़ों के अनुसार मरने वाले लोगो की संख्या 2 लाख 01 हजार से अधिक है। एक दिन मे मरने वाले लोगो की सर्वाधिक संख्या 3285 रही है। विगत कुछ दिनो से लगातार 3 लाख से अधिक केस दर्ज हो रहे है। महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडू, दिल्ली, आंध्रा प्रदेश, वेस्ट बंगाल, और छत्तीसगढ़ सर्वाधिक प्रभावित राज्यो मे है। सर्वाधिक एक्टिव केस महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, और केरल राज्य मे है। कोरोना संक्रमण में यूनाइटेड स्टेट्स अमेरिका के बाद भारत दूसरे क्रम पर है। एक दिन मे मिलने वाले संक्रमितों की संख्या मे मे हम लगातार पहले स्थान पर है। एक दिन मे सर्वाधिक 3.62 लाख केस 27 अप्रैल 2021 को मिले है। विश्व मे हो रहें कोरोना संक्रमण की संख्या मे सर्वाधिक हिस्सेदारी देश की है। जिस गति से देश में कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है वह अत्यंत चिंता का विषय है और यह संभव है की आगामी दिनों मे देश मे स्वास्थ्य कर्मियों की कमी हो जाए। नीति आयोग के एक सदस्य का यह बयान की अब मास्क घर मे भी लगाने की जरूरत है वासत्व मे न केवल डराने वाला है बल्कि वर्तमान स्थिति कितनी गंभीर है इस विषय पर सोचने के लिए सभी को विवश कर रहा है। अब संक्रमण गावों मे भी तेजी से बढ़ना शुरू हो गया है। यदि आपको याद हो तो भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु (IISc) द्वारा कोरोना संक्रमण के अध्ययन में वर्ष 2020 मे यह दावा किया गया था की अनियंत्रण की परिस्थिति में मार्च 2021 तक भारत में 6.2 करोड़ लोगो को कोरोना संक्रमण हो जायेगा और 82 लाख केस सक्रीय होगे, जबकि मरने वालो की संख्या 28 लाख तक हो सकती है। जिस तेज गति से कोरोना की दूसरी लहर देश मे बढ़ रही है इस तरह के आकड़ों तक अपनी पहुँच आगामी कुछ महीनों मे होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। वर्तमान परिस्थिति इस बात पर सोचने के लिए विशेष बल दे रहे है कि इसे नियंत्रित कैसे किया जाये ? जिससे अति महत्वपूर्ण मानव जीवन को बचाया जा सके।

     सरकार के सभी प्रयासों के बावजूद कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है ऐसे में अधिक लोगो को इलाज की जरूरत हो रही है, अभी हम ऑक्सिजन, बेड और दवाओं के लिए लड़ रहे है जिस तेजी से संक्रमण बढ़ रहा है उसके आकलन के आधार पर यह कहा जा सकता है की देश में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, आबादी के अनुपात में काफी कम है और अव्यवस्थित भी है। यह संभव है की जल्द ही हम स्वास्थ्य कर्मियों की व्यापक कमी को लोगों के इलाज के लिए महसूस करेगे। शोधकर्ताओं की एक टीम जो की संबद्ध है सेन्टर फॉर डिजीज डायनमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पालिसी, न्यू दिल्ली/वाशिंगटन डीसी यू.एस.ए., एमिटी यूनिवर्सिटी इंडिया, इम्पीरियल कॉलेज लन्दन यू.के. और प्रिन्सटन एनवायर्नमेंटल इंस्टिट्यूट, प्रिन्सटन यूनिवर्सिटी यू.एस.ए., की एक स्टडी के अनुसार भारत में लगभग 25,778 सरकारी अस्पताल, 43,487 निजी अस्पताल, कुल 69,265 अस्पताल है। सरकारी अस्पताल में बेड की उपलब्धता 7,13,986 निजी अस्पताल में 11,85,242 कुल 18,99,228 है (वर्तमान मे सक्रिय केस की संख्या 29.79 उपलब्ध बेड्स की संख्या मे कही अधिक है)। आई.सी.यु बेड की संख्या सरकारी अस्पताल में 35,699 निजी अस्पताल में 59,262 कुल 94,961 है। वेंटीलेटर्स की संख्या सरकारी अस्पताल में मात्र 17,850 निजी अस्पताल में 29,631 कुल 47,481 है। यह वर्तमान जरुरतों और अंतर्राष्ट्रीय मानको से भी काफी कम है । देश की आबादी 138 करोड़ है। सर्वाधिक अस्पताल (17,103), बेड (2,81,402), आई.सी.यु बेड (14,070), वेंटीलेटर्स (7,035) उत्तर प्रदेश राज्य में है उत्तर प्रदेश मे भी सर्वाधिक स्वास्थ्य उपलब्ध्ता लखनऊ मे है और लखनऊ की वर्तमान स्थिति किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश के अन्य जिलों मे भी कई समस्याएं सामने आ रही है। यही हाल देश के अन्य राज्यों और जिलों का भी है। देश में 1 लाख लोगो पर मात्र 137.62 अस्पताल बेड, आई.सी.यु बेड 6.88, वेंटीलेटर्स 3.44 की उपलब्धता है। हालाँकि राज्य सरकारों और केंद्र सरकार ने कई तरह की व्यवस्थाओं का इन्तेजाम किया है और कर भी रहे है पर बढ़ती संक्रमण संख्या के अनुपात में ये व्यवस्थाये जल्द अपर्याप्त हो सकती है आगामी दिनों मे स्थिति और भयावह हो सकती है क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना लहर की पीक आना अभी बाकी है जिसकी संभावना मई माह मे की जा रही है।

    इस कोरोना वायरस की लड़ाई में प्राथमिक योद्धा डॉक्टर्स और नर्सेज है। वर्तमान परिस्थिति और विभिन्न चेतावनी को भी हमें याद रखने की जरूरत है जिसमे कहा गया है की स्थिति अभी और गंभीर हो सकती है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एक आकड़ो के अनुसार 31 मार्च 2019 तक देश में मात्र 11.59 लाख पंजीकृत डॉक्टर्स है। इनमे से सक्रीय कितने है यह एक बड़ा प्रश्न है। यानि की बढ़ते कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए ऑक्सिजन के पश्चात हमें और अधिक डॉक्टर्स और नर्सेज की आवश्यकता होगी। यदि विस्तृत विवरण देखा जाये तो अधिकांश डॉक्टर आपको शहरों में/निजी अस्पतालों में मिलेगे, जबकि 70 प्रतिशत आबादी गावों में रह रही है और अब गवों मे भी संक्रमण ने तेजी से पाव पसारना शुरू कर दिया है। ऐसे में कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज सम्बंधित आगामी दिनो मे होने वाली समस्या को दूर करने के लिए सरकार को इन उपायों के बारे में अवश्य सोचना चाहिये जिससे संक्रमित लोगो का समुचित इलाज हो सके - 1. DNB, MD, MS की तीन वर्षो की ट्रेनिंग/पढ़ाई पूरी करके लगभग 25,000 युवा डॉक्टर्स परीक्षा का इन्तेजार कर रहे है, ऐसे डॉक्टर्स को अंतिम वर्षो की परीक्षा से छूट देकर देश के विभिन्न जिला अस्पताल में अगले 2 वर्षो के लिए कार्य कराया जा सकता है। यही विधि MBBS पढ़ रहे अंतिम वर्ष के छात्रो पर भी लागू की जा सकती है। 2. दो लाख 20 हजार से अधिक अधिक नर्सेज जिन्होंने अपनी पढ़ाई/प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, पर परीक्षा न होने से कार्य नहीं कर पा रही है। इन्हें परीक्षा से मुक्त कर इनकी सेवाए COVID अस्पताल या जिला अस्पताल में ली जा सकती है। 3. विभिन्न विभागों में कार्यरत डॉक्टर्स जो पिछले 2 से 3 वर्षो से वरिष्ठ डॉक्टर्स के साथ कार्यरत है, उन्हें अनुभव के आधार पर, इस महामारी में, उस विषय की बीमारी के लिए, कार्य करने की अनुमति देकर आवश्यक COVID अस्पताल या जिला अस्पताल पर इलाज के लिए भेजना चाहिये 3. विभिन्न निजी क्षेत्र के डॉक्टर्स का नियन्त्रण सरकार अपने हाथ में ले और आवश्यक जगह, जहाँ महामारी के इलाज के लिए अधिक आवश्यकता है उन्हें वहां इलाज करने के लिए भेजा जाना चाहिये। 4. विदेशो से अध्ययन किये डॉक्टर्स जिनकी संख्या लगभग 20,000 से अधिक है, भारत में परीक्षा न पास करने की वजह से कार्य नहीं कर पा रहे है। इनमे से प्रतिभाशाली डॉक्टरो को कार्य करने की अनुमति देकर आवश्यक जगह पर इनसे कार्य लिया जा सकता है। 5. 1.3 लाख से अधिक युवा डॉक्टर्स पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर्स की सीट की तैयारी मे लगे हुये है जबकि मात्र 35 हजार सीट ही उपलब्ध है ऐसे मे इन डॉक्टर्स को कोविड महामारी मे कार्य लिया जा सकता है और बदले मे ग्रेस मार्क्स की सहूलियत दी जा सकती है। 6. विभिन्न बड़े सभागार, हाल धार्मिक क्षेत्र के बैठक गृहों को सरकार अपने नियंत्रण में लेकर कोरोना इलाज सेंटर, स्थानीय स्तर पर बनाकर लोगो का इलाज वर्तमान और भविष्य के लिए सुनिश्चित करें।

   कोरोना महामारी की वजह से पूरी दुनियां परेशान और भयभीत है। संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में सरकार को भविष्य की स्थिति का आकलन करके डॉक्टर और नर्सेज की उपलब्धता, प्रत्येक स्वस्थ केंद्र तक सुनिश्चित करनी चाहिये। जीवन अमूल्य है, बिना इलाज के मृत्यु की स्थिति से कही बेहतर स्थिति होगी प्रशिक्षित लोगो से इलाज कराने की। मार्च 2020 की देश की स्थिति और वर्तमान स्थिति में जमीन आसमान का अंतर है। सरकार की चिंता लोगो के जीवन के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को चलाने की भी है। भविष्य की कोरोना की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नही लगाया जा सकता है, पर तैयारी करनी बेहद जरुरी है। इस विकल्प की आवश्यकता तब भी हो सकती है, जब अधिक से अधिक लोगो में कोरोना संक्रमण होने से, सामूहिक प्रतिरोध क्षमता उत्पन्न हो जाने पर रोग से लड़ने की क्षमता अपने आप सभी में हो जाये जिससे कोरोना की मारक क्षमता अपने आप कम हो जाये। जिससे कुछ समय पश्चात् कोरोना अपने आप समाप्त हो जायेगा। क्योंकि उस परिस्थिति में भी प्राथमिक उपचार की जरूरत पड़ेगी। 18 वर्ष से ऊपर लोगो को टीका लगाने की आगामी मुहिम मे भी डॉक्टर्स और नर्सेज की जरूरत पड़ेगी। दुनियां के कई देश इस तरह के उपायों को अपना रहे है। अन्य देशो से मदद लेने की अपेक्षा उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करना सर्वथा बेहतर रहेगा। हम सब को इस बात को समझने की भी जरूरत है की बेड्स या अस्पताल किसी मरीजी का इलाज नहीं कर सकते पर डॉक्टर्स और स्वास्थ्य कर्मी जरूर कर सकते है। इन विकल्पों पर सोचने और कार्य करने का सही समय यही है क्योंकि जिस तेजी से जरूरत बढ़ रही है इसकी आवश्यकता कभी भी पड़ सकती है।

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