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"वक्त ने फसाया है, लेकिन परेशान नहीं हूं। हालातों से हार जाऊं, मैं वह इंसान नहीं हूं।।"

 

-रितु कश्यप (केबिन क्रू)

अभी के समय में ज्यादातर लोग परेशान हैं। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है। जिससे भी बात करो वह पॉजिटिव बात नहीं करता। इंसान इतना नेगेटिव हो गया है कि कभी-कभी तो लोग यहां तक बोल देते हैं, लगता है सब कुछ खत्म हो जाएगा। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? सब कुछ खत्म हो जाएगा? ऐसा नहीं है, क्योंकि किसी ने क्या खूब कहा है-

"समय आपके खराब समय को भी बदल देगा।

  बस समय को थोड़ा समय तो दीजिए।।"

इसलिए दोस्तों यकीन कीजिए आज हर तरफ निराशा है पर एक दिन यह निराशा भी हट जाएगी और फिर से सब कुछ अच्छा होगा। पर हां, यकीनन आज जो समय चल रहा है इससे हमें कुछ सीखना जरूर चाहिए। आज लोग ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटक रहे हैं, एक-एक सांसों के लिए मोहताज हो रहे हैं। क्या इसमें हमारी कोई गलती नहीं है? अगर आप सोचें तो लोग बड़ी-बड़ी गाड़ियां खरीद लेंगे, बड़े-बड़े बंगले बनवा लेंगे, लेकिन अपने पूरे जीवन-काल में एक पेड़ नहीं लगाएंगे। हमारा वातावरण आज बहुत ज्यादा दूषित हो चुका है। हम जिस वातावरण में सांस ले रहे हैं उसमें स्वच्छ हवाएं काफी कम है। इसलिए आज के समय को देखकर हम सभी को प्रण लेना चाहिए कि अपने जीवन-काल में कुछ पेड़ अवश्य लगाएं। चलते-चलते आपसे एक कविता शेयर करना चाहती हूं-

"धरती की बस यही पुकार,

पेड़ लगाओ बारंबार।

आओ मिलकर कसम खाएं,

अपनी धरती हरित बनाएं।

धरती पर हरियाली हो,

जीवन में खुशहाली हो।

पेड़ धरती की शान है,

जीवन की मुस्कान है।

पेड़ पौधों को पानी दे,

जीवन की यही निशानी दे।

आओ पेड़ लगाएं हम,

पेड़ लगाकर जग महकाकर।

जीवन सुखी बनाए हम,

आओ पेड़ लगाएं हम।"

आखिर में आप सबसे यह कहना चाहूंगी, इस बुरे वक्त में जिस किसी की भी मदद कर सके अवश्य करें और यकीन कीजिए अच्छा वक्त जल्द आएगा।

एक बार अकबर ने बीरबल से कुछ ऐसा लिखने को कहा- जिसे खुशी में पढ़ो तो गम हो और गम में पढ़ो तो खुशी।

तब बीरबल ने लिखा-

"यह वक्त भी गुजर जायेगा"

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