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भारतीय मजदूर किसान संगठन ने कृषि विधेयक बिल को वापस लेने के लिए प्रधानमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा

भारतीय मजदूर किसान संगठन ने कृषि विधेयक बिल को वापस लेने के लिए प्रधानमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा

रिपोर्ट राकेश पाण्डेय

    सीतापुर। भारतीय मजदूर किसान संगठन अराजनैतिक के जिला अध्यक्ष व राष्ट्रीय  प्रवक्ता धीरज सिंह धीरू ने सैकड़ों किसानों के साथ पारित किसान बिल की तत्काल वापसी के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री के नाम सम्बोधित ज्ञापन अपने कार्यालय पर नायब तहसीलदार सिधौली को सौंपा। 

      ज्ञापन में बताया गया कि पूरे देश ने देखा है कि किस तरह से केन्द्र सरकार ने संसद में बिना बहस या मतदान के  तीन कृषि सम्बन्धित विधेयक कृषि उपज व्यापार व वाणिज्य अधिनियम, किसान सशक्तिकरण और संरक्षण मूल्य आश्वासन का अनुबंध व कृषि सेवा अधिनियम, आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम 2020 जल्दबाजी में पारित करवाए। जिसमें बताया जा रहा है कि कृषि उपज व्यापार बाद नियम किसानों को मण्डी व्यवस्था से मुक्त कर देगा और अब किसान अपना उत्पाद देश में कहीं भी किसी को बेच सकेगा जो बात कहीं नहीं गई है। वह यह कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी समाप्त हो जाएगी यह यही है कि देश में कम ही किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ प्राप्त करते हैं और यह भी कि न्यूनतम समर्थन मूल्य असल में किसानों के लिए अधिकतम मूल्य होता है।उससे ज्यादा पर कोई खरीदता नहीं और ज्यादातर किसानों को सरकारी खरीद केन्द्र के बाहर ही दलालों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर अपना उत्पाद बेच देना पड़ता है लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य एक तरह से किसानों के लिए कवच का काम करता है क्योंकि यह बाजार में एक मानक तय करता है लेकिन जब धीरे-धीरे किसान बाजार पर आश्रित हो जाएगा और न्यूनतम समर्थन मूल्य व मण्डी की व्यवस्था अप्रासंगिक हो जाएगी तो किसान पूरी तरह से बाजार के हवाले हो जाएगा। मण्डी व्यवस्था इसलिए भी बरकरार रहनी चाहिए ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली व्यवस्था व राशन की दुकानें भी कायम रहे।

     किसान मूल्य आश्वासन का अनुबन्ध पत्र की सेवाएं अधिनियम 2020 के तहत बड़ी कंपनियों को खेती के क्षेत्र में प्रवेश मिलेगा वह किसानों से अनुबंध करेंगी और तय करेंगी कि किसान क्या उगाएगा और उसे क्या मूल्य मिलेगा क्या किसानों को चंपारण के दिनों में लौटाने की योजना है। आवश्यक वस्तु अधिनियम 2020 के तहत अनाज दलहन तिलहन खाद्य तेल आलू प्याज जैसे उत्पादों को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया गया है जिसका मतलब यह है कि अब इन वस्तुओं का सीमित भंडारण किया जा सकता है दूसरे शब्दों में कहें तो अब कालाबाजारी को वैध बना दिया गया है।

     उपरोक्त तीनों कानून निजी कम्पनियों के हित में बनाए गए हैं जिससे कंपनियों को तो मुनाफा कमाने के तमाम रास्ते खोज दिए गए हैं और ऋण के बोझ से दबे किसान के और अधिक शोषण का मार्ग प्रशस्त कर दिया गया है।

भारतीय किसान मजदूर संगठन अराजनैतिक की यह मांग है की न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी अधिकार बनाया जाए। किसान आयोग का गठन किया जाए, जो किसानों के लिए लाभकारी मूल्य तय कर सके ऐसा न होने पर भारतीय किसान मजदूर संगठन का आन्दोलन जारी रहेगा। 

     इस अवसर पर जिला अध्यक्ष के साथ पंकज सिंह जिला उपाध्यक्ष, जिला सचिव मोहम्मद इरफान, चन्द्र कुमार सिंह, पवन यादव, शिव चरण यादव, विजय कुमार यादव, गिरजा शंकर पांडेय,अनुपम सिंह, मोहम्मद सलीम, श्रवण कुमार, धीरेंद्र,वीर सिंह, अनुज त्रिवेदी, रामकिशोर, मिहिलाल, सुरेंद्र कुमार, गया प्रसाद, विशाल सिंह आदि काफी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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