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इस राज्यसभा सांसद ने मछवार जाति की उपजातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की रखी मांग

इस राज्यसभा सांसद ने मछवार जाति की उपजातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की रखी मांग

  सत्य स्वरूप संवाददाता

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सांसद जयप्रकाश निषाद लगातार मछवार जाति की उपजातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने को लेकर मांग की हैं। राज्यसभा सांसद ने इससे पहले संसद में भी मछवार जाति की उपजातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का मुद्दा उठा चुके हैं। आज उन्होंने फिर पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार से मांग की है कि मछवार जाति की उपजातियां मल्लाह केवट मांझी निषाद और बिंदु को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग की है। 

    सांसद जयप्रकाश निषाद का कहना है कि भारतीय संविधान में जाति के आधार पर आरक्षण प्रदान करने का विशेष प्रावधान किया गया है। लेकिन भारत जैसे विशाल देश में समाज में हजारों उप जातियों में बटा हुआ है कई बार सिर्फ नाम और उपनाम के भ्रम के कारण बहुत सी ऐसी उपजातियां हैं। जो आरक्षण के लाभ से वंचित रह जाती हैं।ये  जातियां वाकई में आरक्षण के लाभ की वास्तविक हकदार भी है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की अनुसूचित जाति की सूची में उत्तर प्रदेश राज्य के अंतर्गत मझवार जाति का नाम दर्ज है। मझवार जाति की कई उपजातियां है मल्लाह केवट मांझी निषाद और बिंद इन उप जातियों से संबंधित लोगों की सामाजिक हैसियत और उनका सामाजिक जीवन मछवार जाति के लोगों के समान ही है। सामाजिक स्तर पर भी मल्लाह केवट मांझी निषाद और बिंदु उप जातियों के लोगों को मछवार जाति के समान ही समझा जाता है। लेकिन उपनाम की भ्रांति के कारण इन उप जातियों के नाम भारत सरकार की अनुसूचित जाति निमित्त निर्मित अधिकारी सूची में दर्ज नहीं हो सके हैं। जिसका परिणाम है कि यह उपजातियां अनुसूचित जाति के लिए संविधान प्रदत्त लाभों से वंचित रह गई हैं। सांसद जयप्रकाश निषाद ने कहा मैं यह सरकार से मांग करता हूं कि भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए आधिकारिक रूप से तैयार की गई अनुसूचित जाति की सूची में मझवार जाति की उपजाति यों को भी शामिल कर अनुसूचित जाति का दर्जा दिया जाए।जिससे भारतीय संविधान के निर्माताओं द्वारा संजोया गया।

    समतामूलक समाज के निर्माण का सपना भी पूरा हो सके और सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास का नारा और ज्यादा मजबूत कर इन उपजातियों को भी इनका अधिकार मिल सके।

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