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क़ुरआन के मुक़ाबिल आने वाला सिर्फ शैतान हो सकता है उस पर हजारों लानतें - मौलाना इब्ने अब्बास

क़ुरआन के मुक़ाबिल आने वाला सिर्फ शैतान हो सकता है उस पर हजारों लानतें - मौलाना इब्ने अब्बास

   ब्यूरो सगीर अमान उल्लाह

बाराबंकी। क़ुरआन के मुक़ाबिल आने वाला सिर्फ शैतान हो सकता है उस पर हजारों लानतें । क़ायनात का कोई अज़ादार दहशत गर्द नहीं हो सकता , कोई दहशत गर्द अज़ादार कभी नहीं हो सकता । हक़ व बातिल के दरम्यान हद्दे फासिल का नाम  फर्शे अज़ाए शाह है ।यह बात मौलाना इब्ने अब्बास साहब ने इमामबाड़ा मीर मासूम अली कटरा में मरहूम सैयद मुजाहिद हुसैन रिज़वी इब्ने सैयद जाहिद हुसैन रिज़वी,मरहूम अब्बास बान्दी बिन्ते गुलामुस शक़लैन की  मजलिस को खिताब करते हुये कही उन्होने यह भी कहा कि नजात चाहिये तो दायरए इस्लाम मे आजाओ। जिसके पास विलायते अली है वही सच्चा मोमिन  व मुसलमान भी है ।वसीम शैतान का शीयत ही नहीं इस्लाम से भी कोई सरोकार नहीं ,वह दीन से खारिज है।आखिर में करबला वालों के मसायब पेश किया ।सुनकर सभी रोने लगे । मजलिस से पहले अजमल किन्तूरी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा - रोज़े आशूरा शहादत का यक़ीं होते हुये,नासिरों को शाह का सीना सिपर देखा गया ।इसके अलावा कलीम रिज़वी ,अदनान रिज़वी व अयान अब्बास ने भी नज़रानए अक़ीदत पेश किया । निज़ामत के फरायज़ कलीम रिज़वी ने अंजाम दिया ।बानियाने मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

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