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जो खुदा का ज़िक्र करता है खुदा उसे लायक़े ज़िक्र बना देता है - अहमद रज़ा

जो खुदा का ज़िक्र करता है खुदा उसे लायक़े ज़िक्र बना देता है - अहमद रज़ा

   बाराबंकी। जो सिर्फ खुदा को बड़ा समझता है खुदा उसे बुलंदी की मेराज अता करता है जो खुदा का ज़िक्र करता है खुदा उसे लायक़े ज़िक्र बना देता है। यह बात कर्बला सिविल लाइन में अन्जुमन सदाए हुसैन के साहबे बयाज़ मरहूम पीर मोहम्मद पीरु इब्ने कल्लू की बीसवें की मजलिस को खिताब करते हुये ज़ाकिरे अहले बैत अहमद रज़ाने कही।उन्होने यह भी कहा कि दौलत, इज़्ज़त व शोहरत मिले तो खबरदार हो जाओ ये तीनों गुमरही का सबब भी बन सकते हैं । रहबर पर उँगली  उठाने वाले रहबर की अज़मत को पहचाने उनसे वो खुद चलकर मिलने आता है जिससे मिलने के लिये दुनियां की सबसे बड़ी ताकत समझने वाले हाकिम खुद चल कर मिलने जाते हैं।आखिर में करबला वालों के मसायब पेश किए जिसे सुनकर सभी रोने लगे ।मजलिस का आगाज़ तिलावते कलाम ए इलाही से हुआ।मजलिस से पहले डा 0मुहिब रिज़वी ने  पढ़ा - जिसकी तह आज तलक ढूँढ रही है दुनियां, वो बहाए थे कभी इल्म के दरिया हमने हाजी सरवर अली कर्बलाई ने पढ़ा जो नम किये हुये है दिलों की  ज़मीन को ज़िक्र ए गम ए हुसैन की उसको घटा कहो इसके अलावा आसिफ अख्तर बाराबंकवी आसिम नक़वी , हैदर आब्दी, अयान अब्बास काज़मी , रज़ा मेहदी मो0 समद , एहसान व गाज़ी हैदर ने भी नज़रानये अक़ीदत पेश किया ।निज़ामत के फराएज़ अयान अब्बास काज़मी ने अंजाम दिये।

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