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ड्रग्स निरीक्षक की मिली भगत से नगरों में खुलेआम बिक रही है नशीली दवाइयां

ड्रग्स निरीक्षक की मिली भगत से नगरों में खुलेआम बिक रही है नशीली दवाइयां

ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी विरेन्द्र

पलियाकलां-खीरी। नशीली दवाओं पर प्रतिबंध के बावजूद भी नगर के कई मेडिकल स्टोर पर नशीली दवाएं खुलेआम बेची जा रही हैं। जहां इस सूखे नशे के सेवन से युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय हो रहा है, वहीं मेडिकल स्वामियों की चांदी हो रही है। पलिया के कई युवा इस नशे की जद में आकर अपनी जान तक गवां चुके हैं। बावजूद इसके प्रशासनिक अधिकारी व ड्रग निरीक्षक ने क्षेत्र में आकर निरीक्षण करने तक की जहमत नहीं उठाई। पलिया व आसपास क्षेत्र एवं बार्डर के अधिकांश गांवों के युवक कोरेक्स, प्रॉक्सीवॉन, डॅायजीपाम, व नशीले इंजेक्शनों का प्रयोग कर अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं। वहीं उनके परिजन भी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है। आलम यह है कि कुछ युवक नशीली दवा खरीदने के लिए अनुचित कार्य भी कर रहे हैं। क्षेत्र में चोरी आदि की घटनाओं में भी बढ़ोत्तरी हुई है। चौराहों व मुख्य मार्गो से गुजरने वाली महिलाओं को भी नशेड़ी युवकों की छींटाकशी का सामना करना पड़ता है। विरोध करने पर झगड़ा करने से भी गुरेज नहीं करते। अगर शीघ्र सख्त कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई तो युवा अपने जीवन को अंधकारमय बना लेंगे।

कोड भाषा से बेची जा रही नशीली दवाएं

नशीली दवाइयों का सेवन करने वाले युवा व मेडिकल स्टोर स्वामियों के बीच प्रतिबंधित दवा खरीदने को लेकर कोड भाषा का प्रयोग किया जाता है। जैसे-नीले बादाम के नाम से प्रॉक्सीवॉन कैप्सूल, दस रुपये का रिचार्ज कूपन मागने पर डायजीपॉम व एल्प्रेक्स टेबलेट आदि कोड का प्रयोग किया जाता है।

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