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पंचायत चुनाव आरक्षण को लेकर  किसान मंच ने  हाईकोर्ट के आदेश का किया स्वागत

पंचायत चुनाव आरक्षण को लेकर किसान मंच ने हाईकोर्ट के आदेश का किया स्वागत

   रिपोर्ट राकेश पाण्डेय

    सीतापुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया पर उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्ड पीठ द्वारा लगाई गई रोक का भारतीय किसान मंच ने स्वागत करते हुए न्यायालय को धन्यवाद दिया।

     मीडिया के सामने दिए अपने बयान में भारतीय किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष शिव प्रकाश सिंह ने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के सम्बन्ध में जारी आरक्षण सूची में संविधान के अनुच्छेद 243 घ में दिए गए आरक्षण के प्रावधान का अनुपालन नहीं किया गया था।

      उन्होंने कहा कि संविधान के प्राविधान सर्वोपरि होते हैं और इसमें आरक्षण के सम्बन्ध में पद व स्थानों के आवंटन एवं उसमें चक्रानुक्रम व्यवस्था को अपनाने की प्रक्रिया का स्पष्ट निर्देश दिया गया लेकिन जारी की गई सूची में स्पष्ट उल्लंघन किया गया था इसी मनमानानुक्रम के विरोध में जब जिला प्रशासन द्वारा भारतीय किसान मंच की आवाज नहीं सुनी गई तो हमें जन भावनाओं को ध्यान में रखकर मजबूरन न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। आमजन सामाजिक विकास संस्थान के अध्यक्ष शेख फारुख अहमद ने बताया की पंचायती राज एक्ट व संविधान की व्यवस्था के अतिरिक्त इस व्यवस्था को लागू करने के लिए प्रारूप नियम आदि बनाने का काम राज्य सरकार का है और यह  वर्ष 1995 से होता रहा है वर्ष 1995 को ही मूल वर्ष मानकर वर्ष 2000 व आगे के चुनाव सम्पन्न हुए।

      इस दौरान कई दलों की सरकारें रही और हर दल की सरकार अपने लोगों को लाभ दिलाने व अन्य दलों के नेताओं को प्रक्रिया से बाहर करने के लिए येन केन प्रकारेण नियमों से छेड़छाड़ करती रही है कुछ ऐसा ही इस बार भी हुआ है जिसका हम सब ने मिलजुल कर विरोध किया है। भारतीय किसान मंच के प्रदेश प्रवक्ता सचेन्द्र दीक्षित ने कहा कि वर्ष 2015 में नया शासनादेश लाया गया था और इस बार पुनः एक नया शासनादेश जारी कर दिया गया इस बार की जारी की गई सूची में न तो कोई मूल आधार वर्ष लिया गया और ना ही चक्रानुक्रम की व्यवस्था का पारदर्शी ढंग से पालन किया गया।

      उन्होंने कहा कि दरअसल इस मामले में ब्यूरोक्रेसी और सरकार दोनों ने ही संविधान की मूल आरक्षण भावना की अनदेखी की । सरकार को न्यायालय के आदेशों के अनुरूप ही चुनाव कराने होंगे अन्यथा भारतीय किसान मंच सुप्रीम कोर्ट तक मामले को ले जाने के लिए तैयार है। भारतीय किसान मंच के मण्डल मीडिया प्रभारी दिनेश शुक्ल ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आरक्षण सूची के लिए किसी न किसी पूर्व चुनावी वर्ष को तो आधार वर्ष मानना ही पड़ेगा या फिर सरकार कहीं यह तो नहीं कहना चाहती कि पूर्व में हुए चुनाव में अपनाए गए नियम गलत थे यदि ऐसा है तो पूर्व के चुनावों पर ही प्रश्नचिन्ह लग जाएगा भारतीय किसान मंच के जिला अध्यक्ष अंबुज श्रीवास्तव ने कहा कि जिला पंचायत की 60% सीटें मनमाने ढंग से आरक्षित कर दी गई । कुल 79 सीटों में से सामान्य वर्ग को मात्र 30 सीटें मिली हैं उन्होंने कहा के ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों के मामलों में भी कई ब्लॉकों में नियमावली की अनदेखी की गई है पिछले पांच चुनावी वर्षों से जो सीटें अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग की रही हैं उन्हें भी सामान्य करने की बजाय पुनः आरक्षित कर दिया गया है।

     इस मौके पर संगठन के लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर न्यायालय के आदेश पर खुशी जाहिर की।

      इस अवसर पर जितेन्द्र मिश्र, अमित श्रीवास्तव, राजू खान, इस्लामुद्दीन अंसारी,मासूम अली, हारून अहमद, नन्दराम, राजेश मिश्र एडवोकेट, अनुराग श्रीवास्तव, योगराज यादव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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