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कैंसर की शुरुआती डायग्नोसिस और पहचान से मरीजों में सफल इलाज की सर्वाधिक संभावना

कैंसर की शुरुआती डायग्नोसिस और पहचान से मरीजों में सफल इलाज की सर्वाधिक संभावना

   सत्य स्वरूप संवाददाता

   कानपुर। पिछले साल भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा जारी राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 में भारत में कैंसर के 13.9 लाख मामले थे  और यह संख्या 2025 तक बढ़कर 15.7 लाख तक पहुंच सकती है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 में भारत में कैंसर के मामलों में तंबाकू से होने वाले कैंसर के मामलों का 27.1 फीसदी योगदान था।

बीएलके सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल के ही कंसल्टेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. हिमांशु शुक्ला ने कहा, ’कैंसर की शुरुआती डायग्नोसिस और पहचान से मरीजों में सफल इलाज की सर्वाधिक संभावना रहती है। पिछले कुछ दशक में कैंसर केयर और व्यवस्थित उपचार प्रक्रिया में पर्याप्त सुधार आया है, जिस कारण स्वस्थ मरीजों की संख्या में भी पर्याप्त इजाफा हुआ है। मरीजों के देरी से इलाज पर उसके जीवन की गुणवत्ता और बचने की दर दोनों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। कैंसर के उपचार में इतनी तेजी से तरक्की हो रही है कि कई कैंसर मरीजों की देखभाल और उपचार का स्तर कई गुना बढ़ चुका है। हर साल हो रही नई-नई तरक्की से कैंसर मरीजों के लिए नई उम्मीदें जगती हैं और वे फिर से स्वस्थ और सामान्य जीवन जीने की अपेक्षा करने लगे हैं।’

बीएलके सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल के प्रमुख ऑन्कोलॉजी सर्जनों डॉ. सुरेंद्र डबास, सीनियर डायरेक्टर और एचओडी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एंड रोबोटिक सर्जरी और बीएलके सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल के ही कंसल्टेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. हिमांशु शुक्ला के नेतृत्व में आज कानपुर सिटी हॉस्पिटल के सहयोग से कानपुर में पहली कैंसर ओपीडी शुरू की। इस ओपीडी केंद्र पर सिर, गला, ब्रेस्ट, फेफड़ा, भोजन नली, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और यूरोलॉजिकल कैंसर से संबंधित विशेषज्ञ परामर्श और इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी।

इस मौके पर डॉ. सुरेंद्र डबास ने कहा, ’उत्तर प्रदेश के हालात कुछ अलग हैं, क्योंकि यहां कैंसर को लेकर जागरूकता का स्तर बहुत ही कम है। लोग हमारे पास तभी आते हैं जब उनकी बीमारी एडवांस्ड स्टेज में पहुंच जाती है। हमारे पास यहां से ज्यादातर मामले फेफड़े, सिर और गले या महिलाओं के कैंसर के आते हैं। महिलाओं में सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर के ज्यादा मामले पाए जाते हैं। वहीं पुरुषों में फेफड़े, गले और मुंह के कैंसर आम होते हैं। इनमें से ज्यादातर कैंसर के मामले लाइफस्टाइल में मामूली बदलाव करके रोके जा सकते हैं। कानपुर सिटी हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. चमन कुमार वनवानी ने कहा, ’हम इस ओपीडी की शुरुआत करने के लिए देश के सबसे बेहतरीन कैंसर अस्पतालों में से एक के साथ भागीदारी करने को लेकर खुश हैं और यथासंभव ज्यादा से ज्यादा जिंदगियां बचाने की उम्मीद करते हैं। हमार प्रयास हर आम नागरिक को कैंसर संबंधी समस्याओं के बारे में नई-नई जानकारी से लैस करने का है।

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