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शायर ए इंकलाब जोश मलिहाबादी पर आयोजित एक दिवसीय सेमिनार


ब्यूरो रिपोर्ट

बाराबंकी। जंगे आजादी की लड़ाई  में शेरो शायरी से अंग्रेजों के होश उड़ाने वाले  इंकलाबी शायर जोश मलिहाबादी ने बटवारे के बाद  उर्दू के सम्मान को लेकर  बोझिल मन से भारत छोड़ कर पाकिस्तान चले गये जहां उन्होंने अन्तिम सांस ली वीणा सुधाकर महाविद्यालय मसौली के प्राचार्य डॉ बलराम वर्मा ने नगर के लखपेड़ाबाग स्थित एक लॉन में राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद नई दिल्ली के सहयोग से युवा जागृति एवं विकास संस्थान द्वारा रेडक्रॉस सचिव प्रदीप सारंग की अध्यक्षता में शायर -ए- इंकलाब जोश मलिहाबाद पर आयोजित एक दिवसीय सेमिनार को सम्बोधित करते हुए उक्त बातें कही डॉ वर्मा ने अपने सम्बोधन में यह भी कहा कि जोश मलिहाबादी गांधी ,नेहरू ,पटेल जैसे महान नेताओं के साथ आजादी की लड़ाई को परवान चढ़ाने में अहम भूमिका निभाई जिसके लिए  हम सब आज उनके एहसान मन्द है।

सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए प्रदीप सारंग ने कहा कि पदम् श्री पुरस्कार प्राप्त जोश मलिहाबादी ने अपनी रचनाओँ से न सिर्फ ऊर्दू साहित्य को ही नही समृद्ध किया बल्कि क्रान्तिकारी शायर के रूप में अपनी पहचान बनाई है। जोश मलिहाबादी का समग्र ऊर्दू साहित्य महत्त्वपूर्ण है किंतु आजादी से पूर्व रचे गए साहित्य के पुनः प्रकाशन और शोध पर ठोस कार्य उर्दू साहित्य की उन्नति में अत्यंत सहायक होंगे मशहूर शायर सगीर नूरी ने अपने सम्बोधन में कहा कि जोश मलीहाबादी जी की शेरों शायरी जंगे -ए -आजादी की लड़ाई में लोगों को लामबंद करने  को लेकर रही है वही उन्होंने सौंदर्य पर भी बेधड़क लिखा है शायर उबैद अस्सु के संचालन में सेमिनार में सीनियर अधिवक्ता हुमायूं नईम खां , साई कालेज गुरूप संचालक डीके वर्मा ,समाजसेविका गुलजार बनों  बीरबल शर्मा ,हरिप्रसाद वर्मा, बृजेश सोनी, रामविलाश वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किये संस्थान के अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार वर्मा ने लोगों का स्वागत किया।

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