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कोतवाली पलिया में चलती है दलालों की हुकूमत, कैसे होगा निर्दोषों के साथ न्याय

कोतवाली पलिया में चलती है दलालों की हुकूमत, कैसे होगा निर्दोषों के साथ न्याय

  ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी विरेन्द्र

पलिया कलां खीरी। सूबे की सरकार भले ही तख्त और ताज बदलते रहें किन्तु  ब्रिटिश हुकूमत काल में बनाएं गए नियम कानून आजाद हिदुस्तान में जहाँ आम नागरिकों का शोषण केंद्र बिंदु बनकर रह गए हैं वही संवैधानिक पद पर विराजमान काले अंग्रेजों के लिए कामधेनु सावित हो रहें हैं जिसके पीड़ित जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। बिबरण के अनुसार बताते चलें कि सूबे की सरकार सेवा सुरक्षा बंधुत्व को प्राथमिकता देते हुए आये दिन कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के लिए नए नए फरमान जारी करती है जिससे पीड़ित आम नागरिकों को न्याय मिल सकें किन्तु नागरिक सुरक्षा के लिए थाने कोतवाली में संवैधानिक पद पर विराजमान अधिकारी एवं कर्मचारी निजी स्वार्थ के चलते अपने कर्तव्यों के मूल उद्देश्यों को भटककर पीड़ित जनता का ही शोषण करने लग जाते हैं जिससे पीड़ित पक्ष काले अंग्रेजो द्वारा रचित षडयंत्र कारी चक्रव्यूह में फंसकर न्याय पाने उम्मीद में दम तोड़ देता है। न्याय अन्याय के महाभारत की शुरुआत पीड़ित पक्ष के न्याय मांगने के निकटतम कोतवाली पहुँच कर होती है जहाँ काले अंग्रेज पीड़ित पक्ष से सहानभूति जताते हुए अपने मन मुताविक एक लिखित प्राथना पत्र ले लेते हैं और दोषियों पर कार्यवाही करने के नाम पर पीड़ित परिवार को बहलाफुसला कर घर वापसी कर देते हैं उसके बाद प्राथना पत्र हाथ में आते ही संबंधित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी षडयंत्र रूपी चक्रव्यूह रचते हुए विपक्षी से आक्रमक शैली में मिलते हैं जिससे विपक्षी का मनोबल तोड़कर उसको बचाने के एवज में सौदेबाजी कर क्रॉस केस बनाने हेतु एक और विभिन्न आरोपों से युक्त प्राथना पत्र ले लेते हैं इसके बाद पीड़ित पक्ष को सुलह समझौते के लिए हर हथकंडे का इस्तेमाल करते हैं फिर भी पीड़ित के अडिग रहने पर मुकदमा दोनों पक्षो का पंजीकृत कर लिया जाता है उसके उपरांत कानूनी परिक्रमा करते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा क्रॉस केस की इतिश्री करते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा कर मामले को रफा दफा कर देते हैं। और अनन्तः क्षेत्र में अमन चैन कायम करते हुए राम राज्य की स्थापना कर देते हैं।

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