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ट्रामा सेंटर बना ड्रामा सेंटर- भ्रस्टाचार की भेंट चढ़ रही इंसानी जिन्दगियां

ट्रामा सेंटर बना ड्रामा सेंटर- भ्रस्टाचार की भेंट चढ़ रही इंसानी जिन्दगियां

  लगातार मौत बांट रहे अस्पतालों का जिम्मेदार कौन

ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी

पलिया कला खीरी। नगरों में कुकुरमुत्ते की तरह खुले अस्पतालों की बात की जाए तो न डिग्रियां है और ही शासन प्रशासन इन पर कार्रवाई करते हुए दिखाई दे रहा है। जिससे आम जिंदगियों को मौत के काल में ढकेला जा रहा है। आपकों बता दें कि स्वास्थ विभाग के लोग गुलाबी नोटों का रंगीन चश्मा चढ़ाकर मानक विहीन अस्पतालों को रेवड़ी की तरह लाइसेंस बांट रहे हैं जिसकी सज़ा आम लोगों को जान देकर गंवानी पड़ रही है।

 इन्हीं सब वारदातों को संज्ञान लेते हुए नगर के हॉस्पिटलों की प्रदेश स्तर से जांच कराई जाए तो एक ही डॉक्टर की डिग्री से तमाम  हॉस्पिटल ट्रामा सेंटर संचालित हुए नजर आ जाएंगे। वही अगर बात करें नगर में हुई घटनाओं की जो सोमवार को देर रात नगर के अलग-अलग दो हॉस्पिटलों में तीन लोगों की मौतों के चलते होली शब ए बारात की खुशियाँ मातम में बदल गई। वही एक निजी अस्पताल के डॉक्टर अपने आप को फंसता देख भगोड़े डॉक्टर ने दो अन्य व्यक्तियों की अपनी गाड़ी से ठोकर मार कर दी जिससे वाहन स्वामी अस्पताल पहोंच गया अस्पताल पहुंचे सिंघईया निवासी ने अस्पताल के डॉक्टर पर आरोप लगाया की हमें भाग रहे डॉक्टर ने अपनी गाड़ी से ठोकर मारकर फरार हो गया।

नगर वासियो में एक चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या शासन प्रशासन इन मौत के सौदागरों के ऊपर कार्यवाही करेगा या फिर पूर्व की भांति तरह लोगों की मौत से खिलवाड़ होता रहेगा।

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