-->
गौरीफंटा बॉर्डर पर डग्गामार वाहनों की प्रमुखता से छपी खबर का हुआ असर

गौरीफंटा बॉर्डर पर डग्गामार वाहनों की प्रमुखता से छपी खबर का हुआ असर


वन विभाग ने डग्गामार वाहनों को जंगल की जमीन से खदेड़ा, अगली बार किया जाएगा दंडित

ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी 

पलियाकलां खीरी।  गौरीफंटा बॉर्डर पर डग्गामार वाहनों की प्रमुखता से छपी खबर का हुआ असर वन विभाग ने डग्गामार वाहनों को जंगल की जमीन से खदेड़ा और कहा अगली बार वाहनों का जमावड़ा लगा तो किया जाएगा दंडित।

विश्वविख्यात दुधवा नेशनल पार्क की गौरी फंटा रेंज के अंतर्गत कई माह से इंडो नेपाल सीमा के प्रवेशद्वार पर अराजक तत्वों ने पुलिस चौकी की साठगांठ से टैक्सी मैजिक आदि निजी वाहन अवैध रूप से खड़ी कर कब्जा जमा लिया था जिसे आज प्रमुखता से संज्ञान में लेते हुए वन सेना नायक खड़क बहादुर के दिशानिर्देश पर प्रभारी रेंजर रमेश पांडे के कुशल नेतृत्व में दलबल के साथ अवैध रूप से खड़े निजी वाहनों को बलपूर्वक वन विभाग की भूमि से खदेड़ दिया है जिसके चलते टैक्सी चालकों एवं अराजक तत्वो में हड़कंप मचा रहा है। इस कार्यवाही के दौरान वन्यजीव रक्षक सर्वेश कुमार, सुमित कुमार,दुर्गेश यादव,हरवीर सिंह एवं संतोष कुमार सहित अन्य वन कर्मी मौजूद रहे हैं। बताया जाता है कि

विश्व विख्यात दुधवा नेशनल पार्क की गौरीफंटा रेंज में अवैध रूप से खड़ी हो रही टैक्सी, मैजिक एवं निजी वाहनों पर वन विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।  उल्लेखनीय हैं कि इंडो नेपाल सीमा के प्रवेशद्वार पर इन दिनों अराजक तत्वो ने अपने निजी स्वार्थ सिद्ध करने के उद्देश्य से वन विभाग की आरक्षित भूमि पर विना अनुमति के टैक्सी, मैजिक, एवं निजी बस चालकों ने अवैध कब्जा कर लिया था जिससे पार्क क्षेत्र तथा जंगल के जानवरों पर खतरा मंडराने लगा था। इसी को लेकर गौरीफंटा के वन अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों से इस विषय पर लिखित शिकायत करते हुए कार्रवाई के लिए मांग की थी। जैसे ही उच्च अधिकारियों ने इस मामले को संज्ञान लिया और फ़ौरन कार्रवाई करने के निर्देशित दिए। जबकि बॉर्डर पर चलने वाली इन डग्गामार वाहनों से वन विभाग का कोई लेना देना नहीं है। वहीं वन विभाग के लोगों ने  बताया कि कोविड 19 से पहले गौरीफंटा बॉर्डर पर डग्गामार वाहनों का आना पूर्ण तरीके से प्रतिबंध किया गया था जबकि गौरीफंटा कस्टम चौंकी पुलिस चौकी व एस.एस.बी. कैम्प के ठीक सामने ही यह सारा खेल खेला जाता है और चौकियों पर बैठने वाले कर्मचारी बेबस है क्योंकि उनके साहब जब मैनेज हैं तो कर्मचारी क्या करें। वही नियम कानून को ताक पर रखकर डग्गामार वाहन  धन उगाही करने वाले तस्करों ने बॉर्डर की वन भूमि पर कब्जा करते हुए बसेरा बना लिया है। जबकि विभागों की अनदेखी के चलते इन वाहन चालकों से प्रति गाड़ी हिसाब से पुलिस चौकी पर कर्मचारी बसूली भी करते हुए साफ देखे जा सकते है वही अगर वन विभाग को देखा जाए तो समय-समय पर डग्गामार वाहनों पर कार्रवाई करते हुए हिदायत दी जाती है।

0 Response to "गौरीफंटा बॉर्डर पर डग्गामार वाहनों की प्रमुखता से छपी खबर का हुआ असर"

टिप्पणी पोस्ट करें

Ad

ad 2

ad3

ad4