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अपराधियों को बढ़ावा दे रहे पलिया कोतवाली पुलिस,दो दर्जन से अधिक मुकदमों में वांछित अपराधी नगरों फैला रहे खौंफ

अपराधियों को बढ़ावा दे रहे पलिया कोतवाली पुलिस,दो दर्जन से अधिक मुकदमों में वांछित अपराधी नगरों फैला रहे खौंफ

ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी विरेन्द्र

पलियाकलां-खीरी। एक ओर जहां योगी सरकार में अपराधियों पर शिकंजा कसने व उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस विभाग द्वारा अपराधियों को अपराध करने के लिए बढ़ावा देकर उनके हौसले बुलन्द किए जा रहे हैं। अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाला पुलिस विभाग ही यदि अपराधियों को बढ़ावा देकर उनके हौसले बुलन्द करेगा तो कैसे लगेगा अपराधों पर अंकुश और कैसे होगी उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई । बताया जाता है कि पलिया कोतवाली में जबसे भानु प्रताप सिंह की तैनाती की गई है तब से लंबित पड़े हत्या लूट डकैती रेप जैसे तमाम अपराधों के अपराधी बेखौफ नगर में खुलेआम घूम रहे हैं जिन पर 2 दर्जन से अधिक मुकदमे भी दर्ज हैं जिससे पुलिस के ऊपर तो सवाल खड़े ही हो रहे हैं लेकिन कहीं ना कहीं पलिया के लोगों पर भी इन अपराधियों का खौफ बना रहता है ।

ऐसा ही एक मामला लखीमपुर जिले की पलिया कोतवाली में देखने को मिला। कुछ दिन पूर्व नगर के मोहल्ला टेहरा शहरी निवासी अभिषेक सिंह ऊर्फ गोलू पुत्र मदनमोहन सिंह ने पलिया नगर के एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ मारपीट की थी, जिसमें तहरीर देने के बाद भी कोतवाली पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। हालांकि पुलिस ने पीड़ित पत्रकार की ओर से तहरीर तो ले ली थी, किन्तु वादी की बिना सहमति के ही पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर मामले को रफा-दफा कर दिया था। उसके बाद दबंग अभिषेक ऊर्फ गोलू ने नगर के मोहल्ला टेहरा शहरी निवासी विशाल प्रजापति ऊर्फ बन्टी के साथ मारपीट की। इस बार पुलिस पर अच्छा खासा दबाव पड़ा तो पुलिस ने आनन-फानन में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया था। कुछ दिन पूर्व ही अभिषेक जेल से छूटकर आया और दूसरे-तीसरे दिन ही उसने मोहल्ला इन्दिरानगर निवासी अभिषेक जायसवाल के साथ मारपीट की। इतना ही नहीं अभिषेक जायसवाल पर उसने धारदार हथियार से हमला भी किया, जिससे उसके कई गम्भीर चोटें आईं। पीड़ित ने मामले की तहरीर कोतवाली पुलिस को दी। पहले तो पुलिस मुकदमा दर्ज करने में टाल-मटोल करती रही और पीड़ित पर समझौता करने का दबाव डालती रही। जब पीड़ित ने समझौता करने से इंकार कर दिया तो प्रभारी निरीक्षक कोतवाली क्षेत्र की मझगईं पुलिस पर तैनात चैकी प्रभारी उग्रसेन को जांच करने के लिए मौके पर भेजा। जहां चैकी प्रभारी ने पूरे मामले की जांच की और आरोपी अभिषेक ऊर्फ गोलू को कोतवाली ले आए। उसके बाद उन्होंने दूसरे पक्ष अभिषेक जायसवाल को भी कोतवाली बुलाया। जहां चैकी प्रभारी उग्रसेन ने पीड़ित पर समझौता करने का दबाव डाला। जब पीड़ित ने समझौता करने से इंकार कर दिया तो चैकी प्रभारी आगबबूला हो गए और पीड़ित को यह कहकर धमकाने लगे कि उसका कुछ नहीं होगा तुम कितना भी मेडिकल करा लो और कितनी भी सिफारिश लगवा लो, क्योंकि इस पूरे मामले की विवेचना मैं करूंगा। चैकी प्रभारी के यह वाक्य सुनकर वहां बैठे कुछ पत्रकारों ने उनकी बात का विरोध भी किया, लेकिन उनकी भाषाशैली पर कोई प्रभाव पड़ता नजर नहीं आया। कुछ ही देर में आरोपी को पुलिस ने छोड़ भी दिया। कुल मिलाकर चैकी प्रभारी की बात व पुलिस द्वारा आरोपी को छोड़ देने से ऐसा प्रतीत हुआ कि अपराधियों को बढ़ावा कहीं न कहीं पुलिस ही देती है। पुलिस की शह पर ही एक मामूली सी मारपीट करने वाला आरोपी किसी दिन धारा 302 का मुजरिम बन जाता है, जो अन्त में बरबादी की कगार पर पहुंच जाता है। बात दें कि तमाम मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जिनमें मात्र गाली-गौलज करने वाले आरोपियों को पुलिस ने चार-चार दिन कोतवाली में बिठाए रखा। शायद ऐसे आरोपियों को चार-चार दिन कोतवाली में बिठाने का यही कारण रहा होगा कि दूसरे पक्ष द्वारा पुलिस की अच्छी-खासी सेवा कर दी गई होगी। यदि यह कहना गलत है तो फिर एक ऐसे अपराधी (जो जेल भी जा चुका है और फिर लोगों के साथ मारपीट करता घूम रहा है) को पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद भी कुछ ही घण्टों में क्यों छोड़ दिया ? इससे कहीं न कहीं पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहा है।

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