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संतराम मौर्या के आवास पर चल रही सात दिवसीय राम कथा का समापन

ब्यूरो सगीर अमान उल्लाह

बाराबंकी। मसौली कस्बा बांसा सन्तराम मौर्य के आवास पर चल रही सात दिवसीय रामकथा के अंतिम दिन लंका दहन, लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ वध और रावण वध की लीला सुनाई। 

कथावाचिका कु0 सोनम पटेल ने राम भक्त हनुमान के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान से बड़ा भक्त होता है। हनुमानजी महान योद्धा के साथ-साथ ज्ञानी भी थे और अपनी चतुराई के साथ रावण की लंका दहन कर यह अवगत करा दिया था कि जिनका वक्त इतना बलशाली है तो उनसे आप किसी तरीके से पार नहीं पा सकते हैं और आप सीता माता को वापस कर अपनी गलती की माफी मांग लें, लेकिन अपनी राक्षसी प्रवृत्ति के कारण उसने माफी मांगने से इनकार कर दिया। भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम ने समुद्र पर पुल बांधकर लंका में प्रवेश किया। उधर रावण के भाई विभीषण ने भी समझाने का प्रयास किया तो लात मारकर घर से निकाल दिया और विभीषण राम की शरण में पहुंच जाता है। राम विभीषण का राजतिलक कर लंका का राजा बना देते हैं। यह बात जब रावण को पता चलती है तो वह बहुत क्रोधित होता है और बदला लेने को ठान लेता है। रावण, शंकरजी का अपार भक्त था उसने अपने शीश काट कर शंकर जी पर चढ़ाए और प्रसन्न कर वरदान प्राप्त किया था। रावण राम के युद्ध वर्णन बहुत ही मार्मिक ढंग से सुना कर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि अत्याचारी का अंत बुरा होता है। रावण के एकलाख पुत्र और सवा लाख नाती थे, उनका भी अंत अत्याचारी की वजह से हुआ। इसलिए संकल्प लें और घर में रामचरितमानस की कम से कम पांच चौपाई जरूर पढ़े। जीवन में बुराई को त्याग कर सच्चाई की तरफ बढ़ने की प्रेरणा लें।

इस मौके पर सुरेश चन्द्र, सुशील वर्मा, शैलेन्द्र मौर्य, मोनू, रोहित, शालू, रजनीश मौर्य, राममिलन यादव सहित भारी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।

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