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भारत बार-बार दिखा रहा दरियादिली, नेपाल भूला मित्रता

भारत बार-बार दिखा रहा दरियादिली, नेपाल भूला मित्रता

रोटी बेटी के पवित्र रिश्तो को नाकारकर पहुंचाया ठेस

ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी 

पलियाकलां खीरी। भारत-नेपाल के बीच वर्षो पुराना रोटी-बेटी संबंध सीमा विवाद की भेंट चढ़ गया है। चीन की दखल ने आग में घी का काम किया है। पिछले कुछ समय से भारत की ओर किए जा रहे तमाम कोशिशों के बावजूद पड़ोसी देश नेपाल के साथ रिश्ते सहज नहीं हो पा रहे हैं। भारत की तरफ से बार-बार दरियाली दिखाने के बावजूद नेपाल मित्रता भूलता जा रहा है। इस ताजा उदाहरण भारत-नेपाल सीमा पर देखने के मिल रहा है। कोरोना संकट के कारण करीब नौ माह से बंद पड़े बॉर्डर को भारत सरकार ने खोल दिया है, लेकिन नेपाल की सरकार इसके लिए सहमत नहीं है। नेपाल ने बॉर्डर के अपनी तरफ पुलिस बल तैनात कर सीमा को बंद कर रखा है। इससे भारत के सीमा खोलने के बावजूद दोनों देशों के बीच आवाजाही सामान्य नहीं हो पा रही है। जबकि नेपाली नागरिकों का बेरोक तो भारतीय क्षेत्र में प्रवेश जारी है लेकिन नेपाल ने रोटी बेटी के सारे रिश्तो को भूल कर जिस तरह से भारतीय लोगों पर प्रतिबंध लगा रखा है उससे भारतीय नागरिकों में नेपाल के खिलाफ काफी आक्रोश है वही तराई के व्यापारियों का भी कामकाज बिल्कुल चौपट हो चुका है।

चीन की तरह नेपाल भी अब भारत के खिलाफ दोहरा चरित्र अपना रहा है। वह कहता कुछ है और करता कुछ है। भारतीय सरकार ने नेपाली नागरिकों के लिए अपने द्वार खोल रखे हैं लेकिन नेपाल सरकार के दोहरे रवैए ने भारतीय लोगों पर अभी प्रतिबंध लगा रखा है इससे साफ होता है कि नेपाल सरकार रोटी बेटी के इस रिश्ते को निभा पाने में बिल्कुल भी विफल साबित हो रहा है। वहीं भारतीय तराई क्षेत्र के लोगों ने तमाम प्रार्थना पत्र और विरोध प्रदर्शन करने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। कई समाजसेवियों ने तराई के व्यापारियों की आवाज बनते हुए उच्च अधिकारियों के कानों तक पहुंचा चुके हैं, लेकिन जिस तरह से व्यापारी संकट भरे दिन गुजार रहे हैं उससे कई वर्षों तक व्यापारियों को सुधारने में लग सकते हैं।

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