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नए कृषि कानूनों की वापसी के लिए भाकियू ने सीओ रामनगर को सौंपा राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन

नए कृषि कानूनों की वापसी के लिए भाकियू ने सीओ रामनगर को सौंपा राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन

  अमित कुमार

मसौली बाराबंकी। भारत सरकार द्वारा पारित किये गये तीनों कृषि कानूनों को वापिस लिये जाने एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाये जाने के लिए भारतीय किसान यूनियन टिकैत तहसील अध्यक्ष मोहम्मद रियाज एव ब्लाक अध्यक्ष इरफ़ान अली सहित तमाम कार्यकर्ताओ ने सीओ रामनगर दिनेशचन्द्र दुबे एव प्रभारी निरीक्षक विजेंद्र शर्मा को महामहिम राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन सौपा।

तहसील अध्यक्ष मोहम्मद रियाज ने कहा पिछले 4 माह से देश भर व 2 माह से दिल्ली के कई बॉर्डर पर कृषि क्षेत्र के लिए बनाये गये तीन काले कानून के विरोध में सड़क पर है परन्तु सरकार किसानों की बात को सुनने को तैयार नही है। तहसील अध्यक्ष ने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम संशोधन अध्यादेश 2020 पर संसद से लेकर सड़क तक हंगामा हो रहा है। एक तरफ सरकार का दावा है कि इन कानूनों से बिचौलिए खत्म होंगे, भंडारण के क्षेत्र में निवेश बढेगा और किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलेगा। दूसरी तरफ किसान इसे काला कानून बताते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य को समाप्त किए जाने की कोशिश मान रहे हैं। कृषि में खुले बाजार की व्यवस्था वर्ष 2006 से बिहार राज्य और दुनिया के सबसे साधन सम्पन्न देश अमेरिका में 60 सालों से लागू है। खुले बाजार की व्यवस्था का लाभ केवल कम्पनियों को हुआ है। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाकर यह सुनिश्चित करें कि देश में फसलों की खरीद सरकार या व्यापारी द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर नहीं होगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाना इसलिए भी आवश्यक है कि एपीएमसी में बदलाव किया गया है। किसानों को सुरक्षा कवच दिये जाने के उद्देश्य से यह कानून बनाया जाना आवश्यक है।

ब्लाक अध्यक्ष इरफ़ान अली ने नया कानून किसानों के सामने पहले के छोटे व्यापारियों की जगह विशालकाय बडी कम्पनियों को खड़ा करने वाला है जिससे किसान बाजार के सामने और कमजोर हो जायेगा। खुली व्यवस्था एक बेलगाम छलांग है। अभी समर्थन मूल्य केवल सरकारी खरीद पर लागू है। जिससे बिचौलिए उत्पादन को समर्थन मूल्य से कम पर खरीदकर किसानों का खुला शोषण करते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य अभी कानून नहीं बल्कि एक प्रशासनिक व्यवस्था है। मौजूदा हालात में भारत सरकार और माननीय प्रधानमंत्री जी की घोषणा के अनुसार किसानों में स्थायी विश्वास बनाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून बनाते हुए घोषित समर्थन मूल्य से कम पर सभी कृषि फसल विपणन को गैर कानूनी बनाया जाना आवश्यक है। जिससे पूरे देश में एक फसल-एक बाजार-एक मूल्य की व्यवस्था लागू होगी। तीनों बिलों के अध्ययन से स्पष्ट है कि भारत सरकार की मंशा है कि किसानों को खुले बाजार की व्यवस्था दी जाए। जिस तरह से भारत सरकार विश्व व्यापार संगठन के नियमों में बंधे होने के कारण सरकार कृषि सब्सिडी को धीरे-धीरे कम करके समाप्त करना चाहती है और इन तीनों कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। ऐसी स्थिति में दुनिया का उदाहरण है कि किसी भी देश में किसान सब्सिडी या मूल्य सहायता के बिना खेती नहीं कर सकता है। इसलिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाकर बाध्यकारी किया जाना आवश्यक है। महिला ब्लॉक अध्यक्ष शांति देवी मसौली  ने कहा तीनो कृषि कानून वापस लिए जाय क्योकि इनके लागू होने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली, सरकारी खरीद,मंडी प्रभावित होगी। कालाबाज़ारी के कारण महंगाई बढ़ने की भी प्रबल संभावना है।

इस अवसर पर मेराज अहमद उर्फ बबलू खान, प्रेम वर्मा, शकील अहमद अंसारी, संतोष कुमार नाग, तौफीक अहमद खान, जगजीवन वर्मा, सफरउल खान, जयसीराम वर्मा, हरीश चंद्र कश्यप, चांद बाबू, गाजी हसन, सलमान वारिस, सलाउद्दीन अंसारी, गौस मोहम्मद, रामगुलाम गौतम, जगदीश गौतम, सोनू रावत  आदि सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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