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फातिमा जहरा उस जात का नाम है जिसका कसीदा  कुरआन ने पढ़ा

फातिमा जहरा उस जात का नाम है जिसका कसीदा कुरआन ने पढ़ा

ब्यूरो सगीर अमान उल्लाह

बाराबंकी। हैदरगढ़  तहसील स्थित ग्राम बेड़हरी में इमामबाडा मरहूम  रफ़ीक  हुसैन में अय्यामे फात्मीया की अल्बिदाई मजलिस को खिताब करते हुये मौलाना फरहत अब्बास नजफ़ी  सहारन पुरी ने  कही मौलाना ने  ये भी कहा कि सिसकती इंसानियत में जिंदगी डालने वाली को फातिमा जहरा कहते हैं ।फातिमा जहरा उस जात का नाम है जिसका कसीदा  कुरआन ने पढ़ा ।ज़हरा न होतीं तो मक़्सदे दीन अधूरा रह जाता । अली वाले जालिमों के  आगे सर नहीं  झुकाते । वो  खुदा को सबसे बड़ा मान लेते हैं तो दुनियां में किसी को भी सुप्रिम पावर नहीं समझते मोहम्मद व अली के चाहने वाले मजलूमों के मददगार और ज़ालिम के लिये फौलादी दीवार होते है आखिर में बीबी फातिमा ज़हरा और कर्बला वालों के मसायब पेश किये जिसे सुनकर सभी रोने लगे ।मजलिस से पहले अजमल किन्तूरी ने अपना बेहतरीन कलाम  पेश करते हुए पढ़ा निज़ामे दहर में तफ्सीरे सूरए कौसर , इमामतों का हसीं खानदान है ज़हरा ।ये शरफ सिर्फ़ दरे फातिमा ज़हरा को मिला । क़म्बर साहब ने बेहतरीन कलाम पढ़ा -ताना ए  अबतर को सुनकर  अहमदे मुख्तार ने , जो खुलूसे  दिल से मांगा वो दुआ है फातिमा । महदी बाराबंकवी ने अपना कलाम पेश करते हुये पढ़ा - ऐसी उल्फत की खुद बन्दे कफ़न टूट गये ,जब शहेदीं ने पुकारा तुम्हें अम्मा ज़हरा। हाजी सरवर अली करबलाई  ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा-हश्र में बस  वही  पायेगी शिफाअत खातून  अपने  किरदार में जिसनें  तुझे ढाला ज़हरा तू ही   दुनियां में मददगार   है  मेरी बीबी तू ही महशर में है सरवर  का सहारा  ज़हरा इसके अलावा आसिफ अख्तर बाराबंकवी और जईम क़ाज़्मी  ने भी नज़रानए अक़ीदत पेश किया ।मजलिस का आगाज़ तिलावते कलाम ए इलाही से मौलाना अयाज़ हुसैन आलम पुरी  ने किया।

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