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 लापरवाही:दो गज दूरी और मास्क है जरूरी का बैंकों में नहीं हो रहा पालन

लापरवाही:दो गज दूरी और मास्क है जरूरी का बैंकों में नहीं हो रहा पालन

      ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी विरेन्द्र

  पलियाकलां-खीरी। एक ओर जहां पीएम नरेंद्र मोदी और राज्यों के मुख्यमंत्री दो गज दूरी और मास्क है जरूरी के साथ-साथ जब तक दवाई नहीं तब तक ढिलाई नहीं की बात कर रहे हैं। वहीं पलिया की बैंको में लगने वाली भीड़ व बिना मास्क के  कार्यरत कर्मचारियों पर इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा।

गौरतलब है कि आम नागरिक अपनी जरूरतों व समस्याओं को लेकर जैसे ही बैंकों के गेट पर पहुँचता है वहां पहले से ही मौजूद चपरासी बड़ी अभद्रता के साथ लोगों से व्यवाहर करता है यही नहीं बैकं का बिना गेट खोले ही रोड़ों तक भीड़ लगाई जा रही है जब वही आम जन जब आफिस के अंदर पहुँचता है तो वहां का दृश्य देखकर अपने आप को ठगा सा महसूस करता है जहां बावू से लेकर कर्मचारी तक वगैर मास्क के काम करते नजर आते हैं। जिनमे कुछ जो मास्क लगाए हुए होते हैं वो भी केवल दिखावे मात्र के लिए उनके चेहरे पर मास्क तो होता है लेकिन दाढ़ी के नीचे गिरा हुआ होता है।

समझ मे यह नही आता है कि कोरोना के नाम पर यह दोहरी राजनीति किस उद्देश्य से आम आदमी के साथ की जा रही है।

क्या सारे नियम कानून सिर्फ आम नागरिकों के लिए ही है।

बैंकों में काम करने वाले कर्मचारी न सिर्फ कोरोना से बेपरवाह होकर कामकाज निपटाते दिखे जातें हैं बल्कि कोविड-19 की गाइडलाइन की धज्जियां भी उड़ा रहे हैं । बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग तैनात कर्मचारी इस कदर बेपरवाह दिखे कि यहां न तो सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन नजर आया और न ही किसी के चेहरे पर मास्क।

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