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पंचायत चुनाव की हलचल तेज होते ही भ्रष्टाचार की शिकायतें भी बढ़ीं

पंचायत चुनाव की हलचल तेज होते ही भ्रष्टाचार की शिकायतें भी बढ़ीं

ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी विरेन्द्र

पलियाकलां-खीरी। पंचायत चुनाव आते ही ग्रामीण इलाकों में चुनावी हलचल तेज हो गई है  पंचायत चुनाव के लिए सरकार ने कमर कस ली है। मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर 2020 को समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद से सारा कामकाज एडीओ पंचायत ही संभालेंगे। इससे पहले बचे दिनों में प्रधान और सचिव मिलकर राज्य वित्त एवं 15वें वित्त आयोग का बजट खर्च करने में जुटे हुए हैं। तो वहीं गांवों में प्रधानी का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों ने प्रधानों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक-दूसरे की कमियों को गिनाना शुरू कर दिया है। वहीं अगर बात की जाए ग्रामीणों की तो उन्होंने ने भी मौजूद प्रधानों की कमियों के खिलाफ काफी कुछ रख रखा है इसके अलावा ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पदों पर भी चुनाव कराए जाएंगे। सबसे ज्यादा प्रधान पद के चुनाव को लेकर गांवों की सियासत जोर पकड़ने लगी है। अब तक प्रधानों के खिलाफ की जा रही शिकायतों में सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री आवास और शौचालय निर्माण व सड़क योजनाओं में धांधली के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा कहीं-कहीं मनरेगा में भी गड़बड़ी किए जाने के आरोप हैं। इन शिकायतों की जांच कराने में अधिकारियों की धड़कने बढ़ गई हैं, क्योंकि संपूर्ण समाधान दिवस, में लगातार बढ़ रही ग्रामीणों की शिकायत पर उच्च अधिकारीमंथन कर रहे हैं जिससे भ्रष्टाचारियों पर अंकुश लगाया जा सके। वही आईजीआरएस, जनता दर्शन आदि में शिकायतें मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। ऐसे में सभी शिकायतों की जांच कराने में अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। वहीं अगर बात करें पंचायत चुनाव की तो तैयारियां उसकी भी करनी है अब ऐसे में तमाम विभागों के आला अधिकारियों के पास कुछ ही दिन बचे हैं अब देखना यह है कि ऐसे भ्रष्टाचारियों पर क्या कार्रवाई होती हैं।

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