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केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को पलीता लगा रहे कर्मचारी व अधिकारी

केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को पलीता लगा रहे कर्मचारी व अधिकारी

 


पलिया ब्लॉक की उच्च स्तरीय जांच की जाए तो हो सकते हैं कई चेहरे बेनकाब

ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी

पलिया कला खीरी। सूबे की सरकार भले ही आम लोगों के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित कर रही है मगर सरकारी अधिकारी व कर्मचारी इन योजनाओं को पलीता लगाने में कोई भी कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि इस गोरखधंधे में जहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों की संलिप्तता उजागर हो रही है वहीं दलाल संस्कृति के हावी होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। बात चाहे स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के अंतर्गत शौचालयों के निर्माण की हो या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना की, हर योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही है। ऐसा नहीं है कि इस भ्रष्टाचार की पोल नहीं खुल रही है। एक-एक कर घपले उजागर होते जा रहे हैं और कार्रवाई भी शुरू हो गयी है। 

महीनों से रुका है लाभार्थियों का अनुदान

स्वच्छ भारत मिशन के तहत पलिया ब्लाक की ग्राम पंचायतों में विभागीय उदासीनता के चलते कई महीनों से लाभार्थियों का अनुदान रुका हुआ है अनुदान राशि न आने से प्रधानमंत्री आवास व शौचालयों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। इसके चलते गांव का विकास ठप पड़ा हुआ है। लाभार्थी आवाज के छोटी-छोटी दिवाले उठवाकर एवं शौचालय का गड्ढा खोदकर निर्माण कराने के लिए अनुदान का इंतजार कर रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश को खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सरकार ने इस लक्ष्य को शत-प्रतिशत हासिल करने के लिए पंचायती राज विभाग के माध्यम से लोगों को 12 हजार रुपये की अनुदान राशि प्रदान कर घर-घर में शौचालय का निर्माण करवाने की योजना तैयार की है। इस योजना के तहत सरकार ने सभी ग्राम प्रधानों को अपने-अपने गांव में शौचालय रहित घरों को चिन्हित कर अनुदान राशि से शौचालय का निर्माण कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन सभी निर्देशों पर सरकार के में बैठे ब्लॉक स्तरीय अधिकारी पानी फेरने में जुटे हुए हैं।

बचाव के लिए नया रास्ता खोज निकाला

सरकार व उच्चाधिकारियों के दबाव के चलते शौचालयों के निर्माण जल्द कराने की होड़ में दीवार, छत व दरवाजा बनाकर जीरो टैकिंग कर रिपोर्ट भेज दी जा रही है। हकीकत यह है कि पूर्ण शौचालय का निर्माण नहीं हो पाया है। अधिकारियों की सख्ती व कार्रवाई के भय से प्रधानों व कर्मचारियों ने भी नायाब तरीके अपना कर सरकार के पैसों को मिल बांट कर खाया जा रहा है इसी तरीके से भ्रष्टाचारी चरम पर पहुंच गई है। उधर खंड विकास अधिकारी सहित ग्राम पंचायत अधिकारी धन वापसी का रौब दिखाकर जल्द निर्माण पूर्ण कराने की बात कह रहे हैं‌। इतना ही नहीं कई लाभार्थियों को पता तक नहीं और उनके नाम पर धन निकाल लिया गया। इस गोरखधंधे में विभाग के कर्मचारियों सहित समाज के घोटालेबाज किस्म के लोग शामिल रहे। अब जबकि पलिया ब्लाक के प्रधानमंत्री के शौचालय, आवास  सड़क योजना की उच्च स्तरीय जांच शुरू हो जाए तो बहुत से चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

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