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जिला कांग्रेस कार्यालय में जवाहरलाल नेहरू की 131 वी जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन

जिला कांग्रेस कार्यालय में जवाहरलाल नेहरू की 131 वी जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन


  ब्यूरो सगीर अमान उल्लाह


   बाराबंकी। पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न पं0 जवाहर लाल नेहरू गांधीवादी विचारधारा के सबसे मजबूत स्तम्भ थे, नेहरू जी का धर्म निरपेक्षता पर अडिग विश्वास था और उसकी स्थापन के लिये उनके प्रयास महत्वपूर्ण थे उन्होने कभी भी विघटनकारी ताकतो से किसी तरह का समझौता नही किया न ढील बरती।


   उक्त उद््गार उत्तर प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के उपाध्यक्ष तनुज पुनिया ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री भारतरत्न जवाहर लाल नेहरू की 131वीं जयन्ती की पूर्व संध्या पर जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर आयेजित नेहरू जी की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण विषय पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किये जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मो0 मोहसिन तथा संचालन जिला सचिव रमेश कश्यप ने किया।


   जवाहर लाल नेहरू समाजवादी विचारधारा से भी प्रभावित थे इसीलिये उन्होने एक कमजोर बिखरे हुये गरीब देश को संकट से उबारने और मजबूत बनाने के लिये समाजिक विकास के कई पक्षो को अपनी सरकार की योजनाओ में शामिल किया जिसके तहत भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी आदि को सत्ता की जिम्मेदारी मानते हुये योजनाये और कार्यक्रम बनाया पंचवर्षीय योजना, योजना आयोग, पब्लिक सेक्टर उच्चस्तर के स्वास्थ्य एवं शिक्षण संस्थान उसी योजना के हिस्सा थे। नेहरू जी की समाजवादी सोच को ही आगे बढाते हुये पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 श्रीमती इन्दिरा गांधी ने अपने समय में गरीबी हटाओ नारे के अन्र्तगत हरित क्रन्ति, श्वेत क्रन्ति, बैको का राष्ट्रीकरण आदि और पूर्व प्रधानमंत्री डा0 मनमोहन सिंह की सरकार ने उसी सोच के तहत मनरेगा, खाद्य सुरक्षा जैसे कार्यक्रमो को लागू किया, लेकिन मई 2014 के बाद सत्ता में आयी भाजपा सरकार ऐसी लाभकारी योजनाओ को धन का दुरूपयोग समझती है, उनका मानना है कि यदि यह धन पूँजीपतियो को दे दिया जाये तोवे अधिक धन करेगे लेकिन आज जब सम्पूर्ण देश कोविड 19 जैसी महामारी की चपेट मे है तब खाद्य सुरक्षा अधिनियम, मनरेगा ऐसी कल्याणकारी योजनाये ही इस देश की आवाम की काम आयी है इससे सिद्ध होता है कि भाजपा के नेहरू कांग्रेस की विरासत को मिटा पाने का सपना सिर्फ सपना रह जायेगा।


   संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कांग्रेस अध्यक्ष्ज्ञ मो0 मोहसिन ने कहा कि पं0 जवाहर लाल नेहरू बेहद प्रभावशाली बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे जिन्होने कभी भी सम्प्रदायिक ताकतो से समझौता नही किया उन्होने ऐसी शक्तियां जो देश की सांझी विरासत को खंड-खंड करना चाहती थी उनसे साफ शब्दो में कह दिया कि यदि आप मुझे प्रधानमंत्री के रूप मे चाहते है तो बिना शर्तो के मेरा अनुसरण करना होगा और यदि नही चाहते है तो साफ-साफ कहो मै कोइ्र सवाल नही करूंगा मै प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा ओर कांगेस के मुल्यो के लिये स्वतंत्रत रूप से लडूंगा।


   श्री मोहसिन ने कहा कि पूर्ण स्वाराज का विचार सबसे पहले नेहरू जी ने रखा बाद में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने  उनके प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया और प्रस्ताव पास करवाया कि 26 जनवरी 1930 को देश भर में तिरंगा फहराकर पूर्ण स्वराज्य की घोषणा की जायेगी। पंचशील के सिद्धान्त उनके महान चिन्तक और वैश्विक सोच वाले राजनेता का परिचय देते है।
पं0 जवाहर लाल नेहररू की 131वीं जयन्ती की पूर्व संध्या पर आयोजित जयन्ती को मुख्यरूप से उपाध्यक्ष सरजू शर्मा, के0सी श्रीवास्तव, नेकचन्द्र त्रिपाठी, नगर अध्यक्ष राजेन्द्र वर्मा फोटोवाला ने सम्बोधित किया, तथा संगोष्ठी में महिला अध्यक्ष शबनम वारिस, अल्पसंख्यक अध्यक्ष गुलजार अंसारी, श्रीमती गौरी यादव, सुरेश चन्द्र वर्मा, आदर्श पटेल, सिकन्दर अब्बास रिजवी, चैधरी सना शेख, सोनम वैश्य, अजीत वर्मा, प्रशान्त सिंह, मुइनुद््दीन अंसारी, प्रदीप मौर्या, अम्बरीश रावत, शिवम मिश्रा, अरशद अहमद, श्रीकान्त मिश्रा, फिरदौस आलम, देवेन्द्र सिंह, अभय प्रताप सिंह, टीपू सुल्तान सहित दर्जनो की संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।


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