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सिर्फ कागजों में ही पास होके रह गई रोड़,, ब्लॉक अधिकारीयों की भ्रष्टाचारी चरमपर

सिर्फ कागजों में ही पास होके रह गई रोड़,, ब्लॉक अधिकारीयों की भ्रष्टाचारी चरमपर

   सड़क-पानी की समस्या से जूझ रहे कृष्णा नगर वासी

   ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी

   जनपद लखीमपुर खीरी क्षेत्र पलियाकलां आजादी के बाद से कृष्णा नगर गांव में पक्की सड़क नहीं बनाई गई है। पानी निकासी की सुविधा तो दूर बरसात के दिनों में ग्रामीणों का मुख्य रोड़ तक पहुंचने का रास्ता बंद हो जाता है। पलिया शहर के करीब बसे गांव में रहते हुए भी बदहाली का जीवन व्यतीत कर रहे हैं। मगर अभी तक गांव में शासन व प्रशासन द्वारा मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। सुविधाएं नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों में प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में लोग जनसुनवाई से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या को लेकर अभी तक सुनवाई नहीं की गई है।

गंदगी व दलदल में से निकलने को मजबूर हैं ग्रामीण

ग्रामीणों ने गांव की दुर्दशा सुधारने के साथ ही पक्की सड़कें और नालों का निर्माण कर पानी की व्यवस्था कराई जाने की कृष्णा नगर ग्राम वासियों ने मांग की है। दरअसल गांव के लोग आज भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं। गांव के लिए न हीं पक्की रोड़ बनाई गई है और न हीं पीने के पानी की सुविधा है। ग्रामीण प्रशासन की सेवाओं से वंचित रहकर गंदगी व दलदल में से निकलने को मजबूर हैं। बदहाली में जीवन व्यतीत कर रहे कृष्णा नगर वासी कई बार शासन व प्रशासन के अधिकारियों के पास समस्या को लेकर पहुंचे हैं, लेकिन विकास के नाम पर गांव शासन के नक्शे में कोसों दूर है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के वक्त राजनैतिक लोग वादा करके चले जाते हैं, गांव के प्रधान ने भी चुनाव होने से पहले लोगों को भरोसा दिलाया था कि हम गांव में विकास लाएंगे। लेकिन जिस तरीके से समय गुजरता सिर्फ खाऊ कमाऊ की राजनीति रह जाती है। वही कृष्णा नगर की रोड़ लगभग साल भर पहले से मजूर की गई थीं। जिसमें एक रोड़ मुख्य मार्ग से वीरेंद्र कुमार के घर तक पक्की की जानी थी। गांव के लोगों ने बताया गांव में मंजूर की गई सड़कों की पहली किश्त ठेकेदार के खाते में पहुंच भी गई होगी। इसके बाद भी गांव में सड़क निर्माण के लिए एक कदम तक आगे नहीं बढ़ाया गया। जबकि ठेकेदार ने प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर निर्माण की राशि पूरी तरह से हड़प ली है। इसके अलावा गांव में विकास कार्यों के लिए प्रधान ने कई योजनाओं का झांसा दिया। मगर वह महज कागजों में सिमटकर रह गई हैं।

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