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यहां तस्करी के मास्टरमाइंड बच्चों को बना रहे तस्कर,पढ़ने की उम्र में बिहार ले जा रहे हैं शराब..

यहां तस्करी के मास्टरमाइंड बच्चों को बना रहे तस्कर,पढ़ने की उम्र में बिहार ले जा रहे हैं शराब..

         योगी जी इस क्षेत्र को बचाइए

      आसिफ खान

    यूपी के कुशीनगर जनपद में अवैध कारोबार जोरो पर है वैसे तो यह जनपद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद से सटा है लेकिन हालत यह है कि यहां पर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार के सारे तंत्र फेल है ,दरअसल मामला यह है कि यूपी के कुशीनगर और बिहार के गोपालगंज सटे होने के कारण कुशीनगर में रहने वाले तस्करों का बोल बाला ज्यादा है क्योंकि बिहार में शराब बन्द है और यूपी के शराब तस्कर आजकल ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में तस्करी कराने में मशरूफ है ,वैसे आप सबको यह जानकर हैरानी होगी कि इस तस्करी में तथाकथित अच्छे अच्छे लोग कहे जाने वाले तथा तथाकथित सम्भ्रान्त लोगों की सबसे ज्यादा संलिप्तता है,सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि तरया सुजान ,तमकुहीराज ,सेवरही के इर्द गिर्द के रहने वाले युवा नेता ,तथाकथित पत्रकार ,पढ़ने वाले बच्चें ,कई ग्राम प्रधान तथा तमाम व्यवसायी अपने काम के साथ रातों में किसी भी शराब की दुकान से शराब लेकर चार पहिया वाहन और बाइक के सहारे बिहार भेजने का काम करते है। वैसे सबसे ज्यादा दुर्भाग्य यह है कि छोटे छोटे पढ़ने वाले बच्चों को उन्हें  तस्करी में प्रयोग कर उनको पैसे की लालच तथा बाइक देकर शराब को बिहार भेजने का काम जोरो पर चल रहा है,जब इस खबर की तहकीकात किया गया तो पता लगा कि पूरे दिन भर जो आपको बढ़िया कुर्ता पहन कर दिन भर थाने के चक्कर लगाते है मतलब युवा नेता ,ग्राम प्रधान उनकी भूमिका ज्यादा है क्योंकि यही वह शराब का कारोबार है जिनके बदौलत आजकल उनका सारा सिस्टम चल रहा है और वे अपनी राजनीति चमका रहे है।आये दिन हम सभी खबरें तो पढ़ते रहते है कि इस जगह पर शराब बरामद हुई है और उसके साथ इतने तस्कर पकड़े गए हैं लेकिन सबसे बड़ी बात छुप जाती है कि आखिर इन सबके पीछे इसका मास्टरमाइंड कौन है जो ऐसे लोगों से कुछ पैसों का लालच देकर यह घिनौना कार्य करा रहा है ,पुलिस की भी क्या वो तो बस अभियुक्तों को पकड़ वाहवाही लूटने में मस्त रहती है अगर वाकई पुलिस गुड वर्क करती तो उन अभियुक्तो के साथ मास्टरमाइंड को पकड़ती जिससे कि लगता कि पुलिस ने कुछ बेहतर कार्य किया है,लेकिन जिस प्रकार बिहार के बॉर्डर पर इन तथाकथित समाज के ठेकेदारों ने अपना व्यवसाय शुरू किया है उससे आने वाला कल बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होने वाला है क्योंकि जब पढ़ने वाले बच्चें ,नौजवान कुछ बेहतर करने के बजाए ऐसे तस्करी में विलीन हो जॉएँगे  क्या वे अपने आने वाले समय के लिए बेहतर कर पाएंगे ?जवाब है नही ,क्योंकि यहां पर बिना पुलिस के मिलीभगत के बिना कुछ नही होता ,क्योंकि इन बच्चों के जो रक्षक है यानी पुलिस वाले अंकल वही ऐसे कार्य का विरोध तथा दण्डित करने के बजाए इन्हें तस्कर बनने पर मजबूर करते हैं ,आपको बता दूं पिछले साल भी एक स्टिंग ऑपरेशन किया था जिसमें एक थाने के दीवान के द्वारा छोटे छोटे मासूमो को लगाकर 2 बॉटल शराब की लालच देकर मालखाने की शराब हस्तांतरण उनके सर पर करा रहे थे जिन बच्चो के कंधे पर किताबो की थैला होना चाहिए वैसे बच्चों को तो शराब ढुलाने वाले मजदूर बना दिये थे अरे जब पुलिस वाले अंकल ऐसे करेंगे तो आप किससे उम्मीद करेंगे क्योंकि साहब को तो पैसे से मतलब रहता है चाहें वो पैसे कैसे भी आये ।वैसे जिस प्रकार क्षेत्र में यह तस्करी जोरो पर है और जनपद में तैनात बैठे जिम्मेदार मौन है यह समझने के लिए काफी है कि प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ  के मंसूबों पर ऐसे अधिकारी पलिता लगाते हुए नज़र आ रहे हैं।अगर समय रहते हुवे सरकार तथा बड़े अधिकारियों की नज़र इन मास्टरमाइंड पर नही पड़ी तब यह क्षेत्र तस्करी का बड़ा रूप ले लेगा और मास्टरमाइंड पैसे की लालच देकर हर बच्चें बच्चे को तस्कर बनाएंगे...

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