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भुगतान के मामले में फिसड्डी साबित हो रही हैं चीनी मिलें

भुगतान के मामले में फिसड्डी साबित हो रही हैं चीनी मिलें


  ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी


   पलियाकलां खीरी। गन्ना किसानों को भुगतान के मामले में अधिकांश चीनी मिलें फिर फिसड्डी साबित हुई हैं। पिछले सालों की तरह इस वर्ष भी बजाज ग्रुप किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान करने में सबसे पीछे चल रहा है। भाजपा ने किसानों को 14 दिन में भुगतान कराने का वादा किया था, लेकिन हालत एकदम उलटे हैं। 
जनपद की नकदी फसल (कैश क्रॉप) होने के बावजूद किसानों को तंगहाली से गुजरना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा लघु एवं सीमांत किसानों को आर्थिक संकट से जूझना पड़ रहा है। वजह सिर्फ एक है कि मिलें गन्ना एक्ट के नियमों का पालन नहीं कर रही हैं और न ही एक्ट के मुताबिक किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान ही किया जा रहा है। पिछले कुछ सालों से किसानों को छका रही बजाज की पलिया ने पुराना ढर्रा अपना रखा है और जिसके लिए पुराना राग भी मसलन बैंक लिमिट सेंशन न होना अलापा जा रहा है। हालांकि भुगतान व्यवस्था को सही तरीके से लागू कराने के लिए बजाज ग्रुप की मिलों की चीनी समेत अन्य सहउत्पादों की बिक्री और उनसे प्राप्त रकम पर जिला प्रशासन ने अपने नियंत्रण में ले रखा है, बावजूद इसके किसानों का भला नहीं हो सका है।  पिछले वर्ष का बकाया ब्याज का किसी मिल ने भुगतान नहीं किया है। ऐसे में इस वर्ष के ब्याज का भुगतान किसानों को मिलने पर संशय बना हुआ है। गन्ना किसानों को समय से भुगतान न करने के चलते चीनी मिलों पर ब्याज की देनदारी बनने लगी है।


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