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पराली जलाने वालों के विरूद्ध कठोर कार्रवाही की जाए- जिलाधिकारी

पराली जलाने वालों के विरूद्ध कठोर कार्रवाही की जाए- जिलाधिकारी


पराली जलाने पर ग्राम प्रधान के खिलाफ भी कार्रवाही होगी- रवीन्द्र कुमार



ज़िला ब्यूरो तनवीर खान


  उन्नाव। जिलाधिकारी श्री रवीन्द्र कुमार ने समस्त उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे फसल अवशेषों से जलाने से होने वाली हानि तथा भूमि को होने वाले लाभों के सम्बन्ध में जागरूकता अभियान चलायें। उन्होंने कहा कि यदि पराली जलाने से किसान बाज नहीं आए तो आने वाले कुछ सालों में भूमि की उत्पादन क्षमता बहुत कम हो जाएगी। तापमान बढ़ने से पानी की माँग 20 फीसद तक बढ़ेगी जबकि इसकी उपलब्धता 15 फीसद तक घट जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कर किसानों में जागरूकता अभियान चलायें। उन्होंने यह भी कहा कि जिन ग्रामों में पराली जलाई जाए वहां के ग्राम प्रधान के विरूद्ध भी कार्रवाही की जाएं। रवीन्द्र कुमार ने कहां कि अधिकारी किसानों को अवगत कराएं कि एक टन पराली जलाने से हवा में तीन किलो कार्बन कण, 1513 किग्रा कार्बन डाइऑक्साइड, 92 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड, 3.83 किग्रा नाइट्रस ऑक्साइड, 0.4 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड, 2.7 किग्रा मीथेन और 200 किलो राख घुल जाती है। इससे मानव शरीर पर प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि ये ही नहीं  भूमि की ऊपजाऊ क्षमता लगातार घटती रहती है। इस कारण भूमि में 80 फीसद तक नाइट्रोजन, सल्फर और 20 फीसद अन्य पोषक तत्वों में कमी आ जाती है। उन्होंने कहा कि भूमि के मित्र कीट नष्ट होने से शत्रु कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है जिससे फसलों में तरह-तरह की बीमारियाँ हो रही हैं। मिट्टी की ऊपरी परत कड़ी होने से जलधारण क्षमता में भी कमी होती है।
 


  जिलाधिकारियों ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित करें कि कोई भी किसान धान की कटाई बिना कम्बाइन हारवेस्टर बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट के न करने पायें। उन्होंने कहा कि धान की पराली को एकत्रित अथवा क्रय कर गौशालाओं में पहुंचाया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में टीमें गठित कर पराली जलाने की घटना पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाही करें। फसल अवशेष प्रबंधन के सम्बन्ध में प्रतिदिन उनकी अध्यक्षता में बैठक आयोजित हो।


   रवीन्द्र कुमार ने पंचायतीराज अधिकारी को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायतों सचिवों के विरूद्ध कार्रवाही के निर्देश देते हुए कहा कि पराली जलाने वालोें किसानों के विरूद्ध सम्बधिंत थानों में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई जाए।


   जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पराली को जलाने से पर्यावरण के प्रदूषित कण शरीर के अन्दर जाकर खाँसी को बढ़ाते हैं। अस्थमा, डायबिटीज के मरीजों को साँस लेना दूभर हो जाता है। फेफड़ों में सूजन सहित टॉन्सिल्सए इन्फेक्शनए निमोनिया और हार्ट की बीमारियाँ जन्म लेने लगती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी होती है।


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