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पलिया से रात के अंधेरे में मैजिकों से भरकर ले जाई जा रही बॉर्डर क्षेत्रों में खाद

पलिया से रात के अंधेरे में मैजिकों से भरकर ले जाई जा रही बॉर्डर क्षेत्रों में खाद


खुले बाॅर्डर से साइकिल से नेपाल पहुंचाई जाती है खाद


 ब्यूरो चीफ़ अंकुल गिरी


   पलिया कला खीरी। चंदनचौकी , सूंडा, बंनगवां कजरिया सेड़ा बेड़ा बंदर भदारी सहित सीमांत क्षेत्र में तस्कर सक्रिय हैं। कभी नेपाल से चाईनीज मटर तो कभी खाद, प्याज, नशीली दवाइयां और ब्राउन शुगर ड्रग्स जैसी चीजों को चोरी-छिपे नेपाल पहुंचाया जाता है यही हाल है की बॉर्डर पर बैठे सक्रिय तस्कर अपने कामों को सदैव ही किसी न किसी रूप में अंजाम देने का कार्य करते रहते हैं । हालांकि कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण बार्डर सील होने से इसमें कुछ दिनों तक कमी हुई लेकिन वर्तमान में इस खुले बॉर्डर से खाद की तस्करी खुलेआम जारी है। जिसके कारण भारत नेपाल सीमा से सटे बाजारों से तस्कर साइकिल व अन्य माध्यम से नेपाल खाद ले जा रहे हैं।


   इसके कारण प्रयाप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता के बावजूद किसानों को अधिक मूल्य पर खाद खरीदना पड़ता है। वर्तमान में इस खुले बॉर्डर से तस्कर यूरिया का खेप नेपाल पहुुंचाने में लगे हुए हैं। हालांकि इस तस्करी में खाद के दुकानदारों की भी संलिप्तता होती है। इधर प्रशासन द्वारा जांच भी की जाती है लेकिन दुकानदार अपना स्टॉक अपडेट कर अधिकारियों को झांसा देने में सफल रहते हैं। दुकानों पर रेट चार्ट व स्टॉक की सूची भी नहीं दर्ज होती है, जिससे किसानों से दुकानदार मनमाने पैसे का वसूली करते है। यूरिया का मूल्य 266 रुपये है जबकि किसानों से खुलेआम 330 से चार सौ रुपये तक वसूली की जाती है, वहीं उन्हें अन्य खाद भी लेने के लिए दवाब बनाया जाता है। जबकि खाद की तस्करी  इन दिनों जोरों पर जारी है क्षेत्र के चंदन चौकी, कजरिया, सौनाहा, बंदर भरारी, देवराही, नझौटा सूंडा, बनगवां, गौरीफंटा, कमलापुरी, बिशनपुरी, संपूर्णानगर, खजुरिया, आदि सभी बॉर्डर पर तस्कर चोरी-चुपके तस्करी को अंजाम देते है। इस समय खाद भारतीय बॉर्डर क्षेत्र के गांव में डम्प किया जाने लगा है जिससे नेपाल तस्करी की जा सके। वही तस्कर सीमा से 35 किलोमीटर दूर पलिया में पहुंचकर मैजिकों के सहारे खाद खरीदकर बाॅडर पर बसे गांवों में पहुंचाया जाता है और रात के अंधेरे में विभिन्न रास्तों से खाद की तस्करी में लग जाते हैं।


  वही तस्करों के सबसे ज्यादा मुखबिर शातिर होते हैं जो प्रशासनिक अधिकारी एवं पुलिस व एसएसबी पर नजर गड़ाए रहते हैं और उनकी हर एक मूमेंट को तस्करों तक मुहैया कराई जाती है  जबकि तस्करों के मुखबिर दुधवा तिराहा, सिंघिया, टांडा तिराहा, बंसी नगर, तीन बेरियल, चंदन चौकी तिराहा, पर तस्करों के मुखबिर बैठे रहते हैं और हर एक प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस, एस.एस.बी, वन विभाग, पत्रकारों की सूचना पल-पल की भेजी जाती है तस्करों के पास वही विभागों में बैठे अधिकारियों के मुखबिर भी तस्करों के साथ मिलजुल कर बड़े-बड़े गैर कानूनी कामों को अंजाम देने में लगे हुए हैं उन्हीं की छत्रछाया में बॉर्डर पर बैठे तमाम तस्कर कार्रवाई को अंजाम दे रहे हैं। समय के अनुसार ही वे खाद के साथ ही अन्य सामग्री नेपाल में प्रवेश कराते हैं। इधर इसका खामियाजा भारतीय किसानों को भुगतना पड़ता है। एक दुकानदार ने नाम नहीं छापने को लेकर बताया कि यूरिया की सरकारी रेट 266 रुपये है लेकिन तस्करी की वजह से 4:30 सौ से लेकर साडे 600 तक की बोरी बेची जाती है इतना ही नहीं हर एक मैजिक में 50रू बोरी के हिसाब से लोड किया जाता है उसके बाद बॉर्डर पर पहुंचाकर गांवों में डम्प किया जाता है फिर मौका देखकर नेपाल पहुंचा दी जाती है जिसका तीन गुना ऊंचे दामों पर खाद बेची जाती है जबकि इस कामों में भारतीय नागरिक ही नेपाल में लगे हुए हैं। शिकायत करने पर जांच में सिर्फ खानापूर्त होती है।


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